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औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के विलय को एक कदम और...

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बाराकोट के इस आईटीआई का बस साइनबोर्ड रह गया है। किराये पर चलने वाले इस संस्थान के सामान को चंपावत ? - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। कई साल से बंद जिले के छह औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में अब नए प्रवेश नहीं होंगे। इन संस्थानों में न केवल पढ़ने और पढ़ाने वाले कम हैं, बल्कि आधारभूत ढांचा भी नहीं है। अब किराये के भवन में चल रहे इन संस्थानों के सामान को भी हटाया जा रहा है।
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जिले में कुल नौ आईटीआई हैं। इनमें से सिर्फ तीन (टनकपुर, चंपावत और खेतीखान) नेशनल काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) श्रेणी के हैं। इन तीन संस्थाओं के पास भवन सहित मजबूत बुनियादी ढांचा है, जबकि बकाया छह संस्थान स्टेट काउंसिल ऑन वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) श्रेणी के हैं। जिले ये छह आईटीआई (तल्लादेश, बाराकोट, दिगालीचौड़, भिंगराड़ा, बनबसा और रेगड़ू) पिछले दो-तीन वर्ष से बंद थे। इन संस्थानों में काफी समय से दाखिले न होने से यहां के स्टाफ को दूसरी जगह संबद्ध किया जा चुका था। अब इन संस्थानों को बंद करने की दिशा में एक कदम और बढ़ गया है।
अब इन संस्थाओं को अगस्त से किराया नहीं दिया जाएगा। यहां के सामान को नजदीक के आईटीआई या किसी अन्य सरकारी इमारत में रखने के आदेश दिए गए हैं। वैसे अभी प्रवेश प्रक्रिया तो शुरू नहीं हुई है, लेकिन पंजीकरण की प्रक्रिया जरूर चल रही है। इन छह संस्थानों को इस पूरी कवायद से अलग रखा गया है।
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कोट
एससीवीटी वाले आईटीआई में पंजीकरण नहीं होंगे। अलबत्ता किराये पर चल रहे संस्थानों को अपना सामान हटाने के आदेश दिए गए हैं। इन संस्थानों को अब इस माह से किराये की रकम नहीं दी जाएगी। जहां तक पिछले कुछ समय से बंद संस्थानों के विलय का मामला है, इस पर उच्च स्तर से ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
आरएस चौधरी, कार्यादेशक, आईटीआई चंपावत।
ढाई साल से बंद है सीमांत का आईटीआई
चंपावत। सितंबर 2015 को खुला नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश का आईटीआई अधिक समय तक चल नहीं पाया। मंच गांव के जीआईसी के दो कमरों में चला यह संस्थान दिसंबर 2017 से बंद है। वहां मंजूर इलेक्ट्रिशियन, मशीनिष्ट, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन के तीन स्वीकृत ट्रेडों में से सिर्फ एक इलेक्ट्रिशियन ही चला। शेर सिंह महर, पूजा देवी, राहुल सिंह सहित यहां के लोगों का कहना है कि इस आईटीआई से उम्मीद तो थी कि क्षेत्र के युवाओं को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी लेकिन खराब हालात के चलते उनकी ये आस भी टूट गई है। पढ़ाने वालों की कमी के चलते छात्र यहां प्रवेश नहीं ले रहे हैं।
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बंद होने से पहले चंपावत जिले के आईटीआई की तस्वीर:
आईटीआई - विद्यार्थी - ट्रेड
दिगालीचौड़ - 0- 1
भिंगराड़ा - 9- 1
तल्लादेश - 6- 1
बनबसा - 18- 1
बाराकोट - 11- 2
रेगड़ू - 2016 में जीओ हुआ, पर शुरू नहीं हुआ।
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