मां पूर्णागिरि के दर्शन को आया बरेली का एक किशोर बुधवार को नहाते वक्त शारदा में डूब गया। घटना के बाद से पुलिस और स्थानीय तैराकों की टीम उसे खोजने में जुटी है। खबर लिखे जाने तक उसे खोजा नहीं जा सका था। सूचना पर किशोर की मां, भाई और रिश्तेदार यहां पहुंच गए हैं।
गोसांई गौटिया (बरेली) निवासी सतीश पटेल (16) पुत्र स्व. विजय कुमार, सुभाष नगर (बरेली) निवासी रोहित कन्नौजिया (24) पुत्र ओंकार सिंह, गुलरिया इज्जतनगर (बरेली) निवासी रवी पटेल (21) पुत्र त्रिलोकी पटेल और लोहाघाट निवासी जितेंद्र सिंह (13) पुत्र राम सिंह मंगलवार शाम को दो बाइकों से मां पूर्णागिरि के दर्शन को आए थे।
बुधवार को दर्शन कर लौटने के बाद वे टनकपुर के शारदा घाट पर स्नान कर रहे थे कि सतीश अचानक नदी के तेज प्रवाह की चपेट में आ गया। साथियों और घाट पर मौजूद लोगों के शोर मचाने पर वहां मौजूद तैराक पुलिस के जवान और स्थानीय तैराक युवक उसे बचाने नदी में कूदे, लेकिन बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते वह डूब गया।
घटना के बाद स्नानघाट पर अफरा तफरी मच गई। सूचना मिलते ही प्रभारी कोतवाल एसआई मोहन चंद्र भट्ट फौरन मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। पुलिस और स्थानीय तैराकों की टीम नदी में कांटा डालकर उसकी तलाश में जुटे हैं।
-दो बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटा था सतीश
शारदा में डूबा किशोर सतीश दो बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटा था। पिता विजय कुमार का पहले ही निधन हो गया है। घर में मां मिसला देवी, दो बड़ी बहनें और एक बड़ा भाई सुनील है। सतीश बरेली में एक कपड़े के शोरूम में काम कर परिवार के भरण-पोषण में हाथ बंटाता था। जबकि बड़ा भाई सुनील बरेली में ही खोखा लगाता है। सतीश के साथ आए दोस्तों ने बताया कि सतीश इस वर्ष हाईस्कूल की प्राइवेट परीक्षा देने की तैयारी भी कर रहा था।
तो जल पुलिस के जवानों की अनदेखी से डूबा किशोर
शारदा स्नानघाट पर तैनात जल पुलिस के तैराक जवानों की अनदेखी से किशोर के डूबने की घटना हुई है। स्नान करते श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए घाट पर जल पुलिस के तीन जवान तैनात हैं लेकिन फिर भी श्रद्धालुओं को नदी के तेज प्रवाह की ओर जाकर स्नान करने से रोकने वाला कोई नहीं रहता। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घाट पर स्नान कर रहे अन्य श्रद्धालुओं और घाट सुरक्षा कार्य में लगे मजदूरों ने सतीश को नदी के प्रवाह की ओर स्नान करने से रोकने का भी प्रयास किया लेकिन वह नहीं माना।
लोगों का कहना है कि जल पुलिस के जवान श्रद्धालुओं को तेज प्रवाह की ओर जाकर स्नान करने से रोकते तो शायद यह हादसा नहीं होता। बता दें कि वर्षाकाल शुरू होने और पिछले दिनों पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बारिश से इन दिनों शारदा का जल स्तर बढ़ा है। श्रद्धालु नदी के तेज प्रवाह की ओर जाकर स्नान का जोखिम उठा रहे हैं लेकिन जल पुलिस के जवानों को इससे कोई सरोकार नहीं रहता है।