चंपावत। इंग्लैंड की एक गैर सरकारी संस्था के जरिए जिला अस्पताल में अति विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा देने के लिए टेलीमेडिसिन सेवा का सपना दो साल से अधूरा है। इसके लिए इंग्लैंड के रॉयल फ्री हॉस्पिटल की ओर से उच्च श्रेणी की चिकित्सकीय विशेषज्ञता देने के लिए करार (एमओयू) हुआ था लेकिन इस करार का पालन नहीं हो सका।
टेलीमेडिसिन सेवा के जरिए जिला अस्पताल में हृदयरोग, मस्तिष्क की दिक्कतों सहित कई विशिष्ट इलाज दिया जाना था। यहां के लोग इन विशेषज्ञ सेवाओं के लिए 199 किमी दूर सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी या 400 किमी दूर एम्स ऋषिकेश में जाने के लिए मजबूर हैं।
इससे निजात दिलाने के लिए हुए करार के तहत चंपावत जिला अस्पताल के मरीजों के इलाज में लंदन के विशेषज्ञ चिकित्सकों का टेलीमेडिसिन से परामर्श दिया जाना था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बीमारी का पता लगाने, रिपोर्ट का आकलन कर जरूरी दवाएं शुरू करना और लंदन से विशेषज्ञ डॉक्टर का परामर्श देना था लेकिन इसके लिए यहां आधारभूत ढांचा नहीं बन सका। संबंधित कार्मिकों को भी प्रशिक्षण नहीं दिया गया। संवाद
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सीएम, स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में हुआ था करार
चंपावत। टेलीमेडिसिन सेवा के लिए 20 नवंबर 2021 को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की मौजूदगी में लंदन के रॉयल फ्री हॉस्पिटल और इलारा कैपिटल के बीच करार हुआ था। इस पत्र पर उत्तराखंड सरकार की ओर से तत्कालीन स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा, इलारा फाउंडेशन लंदन के सीईओ राज भट्ट और राॅयल फ्री हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. देवाशीष घोष ने हस्ताक्षर किए थे। संवाद
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जिला अस्पताल में ज्यादातर विशेषज्ञ पद खाली
चंपावत। जिला अस्पताल में 30 से अधिक डॉक्टर हैं लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के ज्यादातर पद खाली हैं। हृदय रोग के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। हृदय रोग विशेषज्ञ, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन सहित कई विशेषज्ञों के पद खाली हैं। संवाद
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दो साल पहले एमओयू हुआ था लेकिन इसके बाद कोई खास प्रगति नहीं है। एमओयू के मुताबिक काम शुरू करने के लिए कई बार आग्रह किया जा चुका है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।