यहां साहित्य चेतना मंच की ओर से मासिक काव्य गोष्ठी में रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी।
जीआईसी रोड स्थित देवगंगानुग्रह सदन में प्रकाश जोशी शूल की अध्यक्षता और डॉ. बीसी जोशी के संचालन में हुई गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. विष्णु दत्त भट्ट सरल ने किया। उन्होंने कहा नवप्रभात जीवन का शुभ स्वप्निल निश्चल हो, नवोल्लास, अभिलाष लिए ही आता कल हो, प्रीति प्रतीति हो जड़ चतन में अनिल स्पर्श से, स्वर्ग बने भू दिव्य चेतना नवोत्कर्ष से।
डॉ.भुवन चंद्र जोशी ने कहा ‘मुक्त होने की हर छटपटाहट और उलझा जाती है, एक गांठ सुलझाने की ललक, चार और उलझा जाती है’। शिक्षक फणींद्र पांडेय ने कहा ‘त्याग कर्म ज्ञान की गंगा कहलाती गीता, मर्म इसका जिसने जाना वही असली जीवन जीता’। कवयित्री बबीता जोशी ने कहा ‘ग्रहण चांद में हर वक्त नहीं लगता, वक्त बदलने में वक्त नहीं लगता, इस वक्त को मुठ्ठी में करना, सबके बस में नहीं लगता’।
वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष जोशी ने कहा ‘नशा सत्ता का उतर चुका है मगर, कदम अब भी लड़खड़ाए हुए हैं, देश की फ्रिक, कब, कहां है इनको, प्रगति पर अड़ंगा लगाए हुए हैं, नेताओं के हम सताऐ हुए हैं’। हिमांशु जोशी ने कहा ‘मीलों पैदल चलना अभी, हमें मुख्यधारा में आने को, कोई नहीं सुनता हमारी, यद्यपि बहुत कुछ है हमारे पास सुनाने को’ डॉ. तिलकराज जोशी ने कहा ‘बीता वर्ष तुम बीत गए, हो गए विगत आगत का स्वागत करने, नववर्ष हमें देकर नव उत्साह, नव रंग देकर तुम बीत गए क्षण क्षण बीतकर’। इस मौके पर रामप्रसाद आर्य, कमला जोशी, पुष्कर सिंह बोहरा, मयंक भट्ट, बाल कवि आकाश कुमार, अंजू पांडेय आदि ने भी काव्यपाठ किया।