उत्तराखंड राज्य को 15 साल होने वाले हैं, इसके बावजूद लोहाघाट क्षेत्र के लोगों को रोजाना पेयजल नहीं मिल पा रहा है। यहां हर तीसरे दिन पानी की नाकाफी आपूर्ति हो रही है। तमाम सियासती दावों के बावजूद नौ साल बाद भी सरयू पेयजल योजना मंजूर नहीं हो सकी है।
वर्ष 2006 में कांग्रेस सरकार में कृषि मंत्री रहते महेंद्र सिंह माहरा ने लोहाघाट क्षेत्र के लिए सरयू पेयजल योजना प्रस्तावित की थी। सीएम की घोषणा में भी इसे रखा गया। सितंबर 2013 में 43.95 करोड़ रुपये लागत की डीपीआर बनाई गई थी, लेकिन इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
योजना का सर्वे हुआ और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बनी लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। जिस कारण यहां की करीब 20 हजार की आबादी प्यासी है। पेयजल निगम के मुताबिक 32.34 किमी लंबी इस प्रस्तावित योजना से 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) पेयजल नगर के लोगों को मिलना था।
पांच चरणों वाली इस योजना का मुख्य टैंक मरोड़खान में प्रस्तावित था। उधर जल संस्थान के वर्तमान संसाधनों से लोहाघाट में रोजाना पानी देना फिलहाल मुमकिन नहीं है। जिस कारण सभी नागरिक प्यास बुझाने के लिए छटपटा रहे हैं।
लोहाघाट नगर क्षेत्र को फिलहाल एक तिहाई पानी ही मिल पा रहा है। जल संस्थान चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती का कहना है कि लोहाघाट में पंपिंग योजना, दो ट्यूबवेल, बंसवाड़ पेयजल योजना से करीब छह लाख लीटर पानी की आपूर्ति होती है जबकि मानक के अनुसार यहां रोजाना 18 लाख लीटर पानी की जरूरत है। इस अंतर की वजह से अधिकतर जगह रोजाना आपूर्ति करना कठिन हो रहा है।
लोहाघाट नगर के लोग प्यास बुझाने को इधर-उधर से पानी ढोने को मजबूर हैं। काफी लोग नौले, मांडेक्स हैंडपंप से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं। इसमें अतिरिक्त मेहनत समेत समय की भी बर्बादी हो रही है।
विधायक पूरन सिंह फर्त्याल कहते हैं कि कांग्रेस सरकार सियासी कारणों से क्षेत्र के विकास कार्यों में अड़ंगा लगा रही है। सरयू पेयजल योजना को लेकर वे लगातार आवाज उठाते रहे। इसी का नतीजा रहा कि सितंबर 2013 में इसकी डीपीआर बन सकी। आगे की कार्यवाही के लिए वे इस मामले को सदन में उठाएंगे।