देश की आजादी के 68 साल बाद भी सूखीढांग-धूरा क्षेत्र में सड़क नहीं बन सकी है। जिस कारण दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं जबकि इस क्षेत्र में सात स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजन रहते हैं।
डांडा, ककनई, बुढ़म, कठौल, तलियाबांज, मथियाबांज आदि गांवों से गंभीर रोगियों को कुर्सी की डोली में बैठाकर नगरीय क्षेत्रों के अस्पताल में पहुंचाया जा रहा है।
इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग ने सूखीढांग-डांडा-मीडार सड़क प्रस्तावित की, लेकिन वन संरक्षण अधिनियम की पेचीदगी के कारण सड़क नहीं बन सकी है। वहीं अतिवृष्टि से बंद धूरा से मथियाबांज तक की पांच किमी लंबी सड़क दो साल बाद भी नहीं खुल सकी है।