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बारिश के इंतजार में नहीं की गेहूं की बुआई

Thu, 04 Feb 2016 10:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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छह माह से बारिश नहीं होने से जबरदस्त सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। घाटी के असिंचित क्षेत्रों में जहां 15 मार्च के बाद गेहूं की कटाई शुरू हो जाती थी। वहीं, अब तक इन स्थानों में गेहूं उगा नहीं है, जबकि 25 फीसदी से अधिक किसानों ने जमीन में नमी समाप्त होने से बारिश के इंतजार में गेहूं की बुआई तक नहीं की है। अवर्षण (बारिश न होना) के चलते अब पेयजल संकट भी गहराने लगा है। हिमालय अध्ययन केंद्र से जुड़े शेर सिंह अधिकारी के अनुसार काकड़, बाराकोट, रैघांव, मटियाल, बर्दाखान आदि स्थानों पर गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसान भविष्य की भयावहता से चिंतित हैं। वह सरकारी स्तर से सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित नहीं किए जाने पर आश्चर्य में हैं।
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किसानों का कहना है कि असिंचित क्षेत्रों में जहां जमीन उपजाऊ है, वहां थोड़ी बहुत बारिश होने पर गेहूं का अच्छा खासा उत्पादन हो जाता था, लेकिन बारिश न होने से खेत वीरान पड़े हैं। लोगों के पास अन्य कोई साधन नहीं है, जिससे वे अपना पेट पाल सकें। मुख्य कृषि अधिकारी आरएल चंद्रवाल के अनुसार जिले में 10077 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई की गई, जिसमें 30 से 35 फीसदी क्षेत्र में गेहूं का जमाव हुआ, बाद में बारिश न होने के कारण वह भी खराब हो गया है। जमीन में नमी के अभाव के कारण अब तक 2058 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई नहीं हो पाई है। सूखे से हालात दिनोंदिन बदतर होते जा रहे हैं।
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