-एक गायनाकोलॉजिस्ट चिकित्सा अवकाश पर, दूसरी का पता नहीं
-गर्भवतियों को लगानी पड़ेगी निजी अस्पतालों की दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। चंपावत जिला अस्पताल में तैनात दो गायनाकोलॉजिस्ट में से एक के चिकित्सा अवकाश पर जाने और दूसरे के बगैर बताए कहीं चले जाने से गर्भवतियों के प्रसव नहीं हो पा रहे हैं।
चंपावत अस्पताल में गर्भवतियों का इलाज बंद हो गया है। अस्पताल में तैनात एक गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका कांडपाल दो सप्ताह के मेडिकल अवकाश पर हैं जबकि दूसरी डॉ. मंदाकिनी तबीयत खराब होने की बात कहकर तीन जुलाई से अस्पताल नहीं आईं। यह गायनाकोलॉजिस्ट पूर्व में मातृत्व अवकाश पर भी थीं। अब गायनाकोलॉजिस्ट बिना किसी लिखित पत्र के अवकाश पर चली गईं हैं, लेकिन वह कब आएंगी इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
दोनों के अस्पताल में नहीं होने से गर्भवतियों के लिए इलाज कराना मुश्किल हो गया है। गायनोकॉलोजिस्ट नहीं होने से अस्पताल में आने वाली गर्भवतियों के सिजेरियन समेत सामान्य प्रसव भी मुश्किल से हो पाएंगे। पूर्व में भी कई बार गायनोकॉलोजिस्ट नहीं होने से गर्भवतियों को रेफर किया गया जा चुका है।
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अस्पताल में तैनात गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका कांडपाल दो सप्ताह के मेडिकल अवकाश पर हैं जबकि दूसरी डॉ. मंदाकिनी ने तबीयत खराब होने की बात कही है। वह तीन जुलाई से अस्पताल में नहीं है। यह गायनाकोलॉजिस्ट पूर्व में मातृत्व अवकाश पर थीं।
डॉ. पीएस खोलिया, पीएमएस, चंपावत।
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ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को होगी दिक्कत
चंपावत। जिला अस्पताल में प्रसव नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवतियों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश महिलाएं जिला अस्पताल में ही प्रसव के लिए आती हैं। ऐसे में उनके लिए बाहर प्रसव कराना आसान नहीं होगा।