फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पिरूल से बिजली तैयार करने की योजना में नहीं दौड़ा करंट

विज्ञापन
No Electricity by pirool in champawat
विज्ञापन
सतीश जोशी ‘सत्तू’
विज्ञापन

चंपावत। जिले में पिरूल से बिजली बनाने की कवायद को झटका लग गया है। वन विभाग और उत्तराखंड वैकल्पिक ऊर्जा संस्थान (उरेडा) को प्रस्तावित बिजली प्लांट संचालित करने के लिए बीते एक वर्ष से एक भी आवेदक नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण प्रस्तावित प्लांट फिर अधर में लटक गया है।
एक साल पूर्व वन विभाग की ओर से पिरूल के निस्तारण, वनाग्नि की घटनाओं पर अंकुश लगाने और स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से देवीधुरा रेंज के धैना ग्राम पंचायत में उरेडा के सहयोग से 15 किलोवाट क्षमता का बिजली उत्पादन प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित किया था।
विज्ञापन

वन विभाग और उरेडा की ओर से प्लांट के संचालन के लिए स्थानीय लोगों से आवेदन मांगे थे। 11 लोगों ने प्लांट संचालित किए जाने के लिए आवेदन भी किए लेकिन प्लांट लगाने के लिए आवेदकों के नाम नाप भूमि होने की अनिवार्यता के चलते सभी आवेदक पीछे हट गए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी हिमालय सिंह टोलिया के अनुसार अब तक एक भी व्यक्ति ने प्लांट संचालन के लिए रुचि नहीं दिखाई है, जिस कारण आगे कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
देवीधुरा क्षेत्र के धैना ग्राम पंचायत में पिरूल आधारित बिजली प्लांट के संचालन के लिए आवेदक नहीं मिल रहे हैं। प्लांट के लगने से जहां पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता। अब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्लांट संचालित करने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है। - मनोज कुमार बजेठा, उरेडा, परियोजना अधिकारी, चंपावत।
विज्ञापन

ब्रिकेट और कोयला बनाने की फैक्ट्री हुई बंद
चंपावत। जिले में पूर्व में पिरूल से ब्रिकेट और कोयला बनाने की योजना भी परवान नहीं चढ़ सकी है। नब्बे के दशक में खेतीखान क्षेत्र में पिरूल से ब्रिकेट और कोयला बनाने की फैक्ट्री लगाई गई थी। लेकिन बाजार में मांग कम होने के कारण जल्द ही फैक्ट्री बंद हो गई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें