चंपावत। भाजपा प्रत्याशी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चंपावत सीट से उप चुनाव में कांग्रेस की ओर से निर्मला गहतोड़ी टक्कर देंगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मुकुल वासनिक की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में उनके नाम की घोषणा की गई। निर्मला गहतोड़ी आठ साल तक कांग्रेस की जिलाध्यक्ष रही हैं। वह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी। जिलाध्यक्ष पूरन सिंह कठायत ने कहा कि कांग्रेस पूरी एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में कूदेगी।
चंपावत सीट से कांग्रेस ने पहली बार टिकट बदला। उत्तराखंड बनने के बाद 2002 से इस साल फरवरी 2022 तक हुए पांच चुनावों में हेमेश खर्कवाल को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया। चुनाव लड़ने की खर्कवाल की अनिच्छा के बाद पार्टी ने कई विकल्पों पर विचार करने के बाद पूर्व जिलाध्यक्ष निर्मला गहतोड़ी को टिकट दिया। इसी के साथ कांग्रेस ने पहली बार किसी महिला को टिकट दिया। इससे पूर्व भाजपा 2007 में बीना महराना और 2012 में हेमा जोशी को टिकट दे चुकी है। बीना महराना को चुनाव में जीत भी मिली थी। कांग्रेस प्रत्याशी गहतोड़ी ने कहा कि वह भाजपा की कथनी और करनी को जग जाहिर करने के साथ महंगाई, बेरोजगारी सहित जनता के मुद्दों को उठाकर वोट मांगेंगी। सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि पार्टी निर्मला गहतोड़ी के लिए पूरी तरह एकजुट है। कांग्रेस खटीमा सीट की तरह ही चंपावत उप चुनाव जीत कर नया इतिहास रचेगी। चंपावत सीट पर 96016 मतदाताओं में से 45959 महिलाएं और 50057 पुरुष वोटर हैं।
नाम: निर्मला गहतोड़ी।
शैक्षिक योग्यता: इंटर।
उम्र: 59 वर्ष
पति: प्रयाग दत्त गहतोड़ी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य।
संतान: दो बेटे और एक बेटी।
राजनीतिक सफर
1996 से 2002 तक ग्राम प्रधान।
2001 से 2010 तक कांग्रेस जिलाध्यक्ष रहीं।
2003 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा।
2010 में एआईसीसी सदस्य बनीं, वर्तमान में पीसीसी सदस्य।
2012 में बीसूका अध्यक्ष।
2015 में महिला सशक्तीकरण उपाध्यक्ष।
2015 से 2018 तक राज्य समाज कल्याण बोर्ड अध्यक्ष।
अंजू, गंगा के बाद अब निर्मला
कांग्रेस ने उप चुनावों में तीन साल में तीसरी महिला को दिया टिकट
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। अंजू लुंठी और गंगा पंचोली के बाद अब निर्मला गहतोड़ी चुनाव मैदान में उतारी गई हैं। उप चुनाव में तीन साल में तीसरी महिला को टिकट मिला।
चंपावत उप चुनाव में निर्मला गहतोड़ी को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है। वर्ष 2018 के बाद से कुमाऊं में हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी बनाए हैं। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के निधन के बाद नवंबर 2019 में पिथौरागढ़ सीट पर हुए उप चुनाव में भाजपा की चंद्रा पंत को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने अंजू लुंठी को उम्मीदवार बनाया था। 26086 वोट लाने वाली भाजपा ने 3267 वोट से जीत दर्ज की। विधायक सुरेंद्र जीना की मौत के बाद अप्रैल 2021 में अल्मोड़ा जिले की सल्ट विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए। इसमें भाजपा के महेश जीना को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने गंगा पंचोली को उतारा। उप चुनाव में जीना को 21874 और पंचोली को 17177 वोट मिले।
निर्मला गहतोड़ी को इसलिए मिला टिकट:
1.पांच बार चुनाव लड़े और दो बार विधायक रहे हेमेश खर्कवाल की अनिच्छा।
2.संगठन का व्यापक अनुभव और वरिष्ठता को तवज्जो। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के खेमे की मानी जाती हैं।
3.भाजपा प्रत्याशी सीएम पुष्कर सिंह धामी के मुख्य चुनाव संयोजक और दो बार के भाजपा विधायक कैलाश गहतोड़ी के जातीय संतुलन को निस्तेज करना।
4.पहाड़ के साथ मैदान को साधना।
5.महिला प्रत्याशी होने से महिलाओं के मुद्दों को उठा महिला वोटों में सेंधमारी।
चंपावत सीट से अब तक निर्वाचित विधायक:
वर्ष: विजेता- उप विजेता
2002: कांग्रेस, हेमेश खर्कवाल 8380: निर्दलीय मदन सिंह महराना 7985
2007: भाजपा, बीना महराना 22928: कांग्रेस हेमेश खर्कवाल 15870
2012: कांग्रेस, हेमेश खर्कवाल 20330: बसपा मदन सिंह महर 13377
2017: भाजपा, कैलाश गहतोड़ी 36601: कांग्रेस हेमेश खर्कवाल 19241
2022: भाजपा, कैलाश गहतोड़ी 32547: कांग्रेस हेमेश खर्कवाल 27243
जिसकी सत्ता उसका हुआ चंपावत
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अब तक बरकरार है यह मिथक
चंपावत सीट से जो जीता प्रदेश में भी उसी दल की बनी सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। विधानसभा की गंगोत्री सीट की तरह ही चंपावत सीट के साथ एक मिथक है। मिथक यह कि इस सीट के वोटरों ने हमेशा प्रदेश में बनी सरकार के पक्ष वाले प्रत्याशियों को जिताया है। अब तक पांच बार चंपावत सीट के वोटरों ने सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी के लिए वोट किया है लेकिन इस बार 31 मई को यहां के मतदाताओं को आम चुनाव नहीं उप चुनाव में सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी के भाग्य का फैसला करना है।
उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनी थी। तब चंपावत सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हेमेश खर्कवाल ने निर्दलीय मदन सिंह महराना को हराया था। 2007 में हुए चुनाव में कांग्रेस को हार मिली। तब भाजपा प्रत्याशी बीना महराना ने कांग्रेस को हराया था और सरकार भी भाजपा की बनी। 2012 के चुनाव में चंपावत से कांग्रेस के हेमेश खर्कवाल ने जीत दर्ज की तो सरकार भी कांग्रेस की बनी। 2017 के चुनाव में चंपावत सीट भाजपा के पास गई और प्रदेश में सरकार भी भाजपा ने बनाई। इस साल फरवरी में हुए चुनाव में चंपावत सीट लगातार दूसरी बार भाजपा ने जीती और प्रदेश में लगातार दूसरी बार सरकार भी भाजपा की ही बनी।