यूपी शासन काल के दौरान पाटी में स्थापित किया गया गैस गोदाम आज तक नहीं खुल पाया है। इस गोदाम को बने 23 साल हो गए हैं, लेकिन इसका ताला एक दिन के लिए भी नहीं खुला। देखरेख के अभाव में अब इसका भवन भी जर्जर हो चुका है। धन की बर्बादी का नमूना बने इस गोदाम के संचालित नहीं होने से यहां के लोगों को गैस रिफिलिंग के लिए तीस किमी दूर लोहाघाट जाना पड़ता है।
तहसील व ब्लाक मुख्यालय पाटी और इसके आसपास के गांवों में दो हजार से अधिक रसोई गैस के उपभोक्ता हैं। इनको गैस सिलेंडर रिफिलिंग कराने के लिए 30 किलोमीटर दूर लोहाघाट जाना पड़ता है। यहां के लोगों का कहना है कि रिफिल करने में उन्हें 100 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। वह भी तब जब यहां चंपावत जिले के सृजन से पूर्व पिथौरागढ़ जिले के दौरान यूपी शासन काल में छह अक्तूबर 1995 को पाटी के गैस गोदाम का शिलान्यास तत्कालीन ब्लाक प्रमुख लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने किया था। इसके कुछ ही महीनों में गैस गोदाम का निर्माण भी पूरा हो गया। लेकिन करीब दस लाख रुपये की लागत से बने कुमाऊं मंडल विकास निगम के इस गोदाम का उपयोग तो दूर, ताला तक कभी नहीं खुला।
गैस सिलेंडर रिफलिंग कराने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए व्यापारी व विभिन्न संगठन गैस गोदाम को संचालित करने के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं। लेकिन आज तक न यहां गैस गोदाम खुल सका और नहीं यहां गैस रिफिलिंग की सुविधा मिल सकी। अलबत्ता महीने में इक्का-दुक्का बार लोहाघाट के गैस वितरण केंद्र से सिलेंडरों की आपूर्ति की जाती है। बाकी के दिनों गैस समाप्त होने पर लोगों को रिफलिंग के लिए लोहाघाट की दौड़ लगानी पड़ती है। उप जिलाधिकारी निर्मला बिष्ट का कहना है कि गैस गोदाम के भवन के उपयोग के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। मरम्मत कर इसे उपयोग के लायक बनाया जाएगा।
कोट
वर्षों पूर्व चंपावत जिले में पांच गैस गोदाम बने थे, लेकिन ये गोदाम सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते हैं। किसी भी गैस गोदाम के संचालन के लिए इंडियन ऑयल कंपनी के मानकों का पूरा किया जाना जरूरी है। मानकों को पूरा किए जाने पर ही आईओसी की मंजूरी मिलती है। ये गोदाम मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। इस कारण पाटी सहित इन तमाम गोदामों का उपयोग नहीं हो सका।
टीएस मर्तोलिया,
महाप्रबंधक, केएमवीएन (गैस)।