भारतीय सीमा पर स्थित नेपाल के कंचनभोज में बनने वाले सूखा बंदरगाह (ड्राइपोर्ट) का विरोध शुरू हो गया है। गत दिवस सर्वे करने आई दोनों देशों की टीम को ग्रामीणों ने खदेड़ दिया। साथ ही वाहनों में तोड़फोड़ भी की। नेपाली ग्रामीण विस्थापन और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
नेपाल के कंचनपुर जिले की महाकाली नगरपालिका क्षेत्र के कंचनभोज में नेपाल सरकार सूखा बंदरगाह बनाने जा रही है। जिसके लिए भारतीय और नेपाली सर्वे टीम कंचनभोज पहुंची, लेकिन वहां टीम को नेपाली जनता का कोपभाजन बनना पड़ा। नेपाली नागरिकों ने सर्वे टीम के साथ दुर्व्यवहार किया और वाहनों में तोड़फोड़ कर दी। नेपाल के निर्वाचन क्षेत्र 3 (ख) के सांसद मान बहादुर सुनार ने उक्त घटना की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि कंचनभोज के तक्कनाटी टोल और कासीपुर टोल के निवासी सूखा बंदरगाह निर्माण का विरोध कर रहे हैं, जबकि अधिकतर ग्रामीण सूखा बंदरगाह को नेपाल के विकास के लिए जरूरी बता रहे हैं। बताया गया कि सूखा बंदरगाह निर्माण के लिए 90 बीघा भूमि की आवश्यकता है, जबकि वहां केवल 20 बीघा भूमि सरकारी जमीन है। शेष 70 बीघा भूमि स्थानीय ग्रामीणों की अधिग्रहण की जानी है। (नेपाल की एक बीघा भूमि भारत की नौ बीघा भूमि के बराबर है।) इस पर ग्रामीण उचित मुआवजा और विस्थापन की मांग कर रहे हैं। बताया गया कि भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ कामर्स के अनुराग शर्मा और नेपाल वाणिज्य मंत्रालय के रविशंकर सेन्जु के नेतृत्व में पहुंची सर्वे टीम फिलहाल लौट गई है।