छात्र नीरज की ओर से तैयार किया गया ऑटोमैटिक वाटर टैंक।
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जीआईसी में कक्षा आठ में अध्ययनरत छात्र नीरज कुमार के मॉडल का चयन इंस्पायर अवार्ड की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है। देहरादून में 11 और 12 फरवरी को आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में नीरज की ओर से प्रस्तुत दिव्यांग व्यक्तियों को ध्यान में रखकर बनाया गया मॉडल ऑटोमैटिक वाटर टैंक का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है।
नीरज के इस मॉडल को जिला स्तर पर पहला स्थान मिला था। यह मॉडल उन्होंने अपने मार्गदर्शक शिक्षक भौतिक विज्ञान प्रवक्ता मनोज कुमार जोशी के दिशा निर्देशन में तैयार किया है। नीरज की इस सफलता पर सीईओ आरसी पुरोहित, बीईओ अंशुल बिष्ट, प्रधानाचार्य सीपी गहतोड़ी, जिला समन्वयक उमेद सिंह बिष्ट, ललित मोहन बोहरा, नवीन चंद्र पंत, पान सिंह मेहता और जगदीश अधिकारी आदि ने खुशी जताई है।
ऐसे काम करता है ऑटोमेटिक वाटर टैंक
चंपावत। नीरज की ओर से तैयार किया गया ऑटोमैटिक वाटर टैंक लकड़ी का बना हुआ एक बाक्स है, जिसके भीतरी भाग में वाटर टैंक है। बाहर की ओर से नल लगा हुआ है। साथ ही एक प्रेशर-पैड बना हुआ है। जैसे ही प्रेशर पैड पर पैरों की सहायता से दबाव डाला जाता है, वैसे ही तुरंत नल से पानी निकलने लगता है।
प्रेशर के हटते ही पानी का निकलना भी बंद हो जाता है। यह उन दिव्यांगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जिनके हाथ नहीं हैं और जो पैरों की सहायता से प्रेशर पैड पर खड़े होकर नल से पानी भरना चाहते हैं। इस मॉडल की एक और खास बात है कि यह पानी की बचत भी करता है, क्योंकि यह पूर्णत: प्रेशर आधारित मॉडल है और सस्ता भी है।