बनबसा के देवभूमि विद्यापीठ में हुए 39.52 लाख रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में पुलिस अब आरोपियों तक पहुंचने के लिए एनबीडब्ल्यू (गैर जमानती वारंट) का प्रयास करेगी। एसपी लोकेश्वर सिंह का कहना है कि पुलिस एनबीडब्ल्यू के लिए अदालत जाएगी।
छात्रवृत्ति घोटाले में सहायक समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल सात लोगों के खिलाफ पिछले साल 15 दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया गया था। विद्यापीठ के संचालकों को पकड़ने के लिए हरिद्वार-रुड़की गई विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीम भी खाली हाथ लौट आई थी।
देवभूमि विद्यापीठ नाम की गैर मान्यता प्राप्त संस्था पर 2015-16 में 221 एससी और 140 एसटी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति के नाम पर 39.52 लाख रुपये के घोटाला का आरोप है। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि पुलिस जांच में इस बात की तस्दीक हुई थी कि समाज कल्याण विभाग से मिली यह रकम विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंची।
इसके बाद बनबसा थाने में विद्यापीठ के संचालक चैरब जैन, अनिल गोयल, विवेक शर्मा, गौरव जैन (हरिद्वार जिला निवास4ी), बिचौलिए मुकेश कुमार और प्रदीप (दोनों यूएसनगर जिला निवासी) और तत्कालीन सहायक समाज कल्याण अधिकारी गोपाल सिंह राणा के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
टनकपुर के कोतवाल धीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में एसआईटी ने संचालकों को दबोचने के लिए एक पखवाड़े पूर्व हरिद्वार और रुड़की में दबिश भी दी गई लेकिन कोई भी आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका। एक आरोपी किसी मामले में पहले से ही जेल में है। जबकि एक अन्य आरोपी ने गिरफ्तारी के खिलाफ स्टे लिया है। अब पुलिस आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू लेने का प्रयास कर रही है।
छात्रवृत्ति देने वाले कॉलेजों के सत्यापन में जुटी पुलिस
चंपावत। देवभूमि विद्यापीठ में हुए छात्रवृत्ति घोटाले के उजागर होने के बाद पुलिस अब छात्रवृत्ति देने वाले तमाम अन्य शिक्षण संस्थानों के सत्यापन में जुट गई है। एसपी लोकेश्वर सिंह का कहना है कि धांधली का पता लगाने के लिए छात्रवृत्ति देने वाले जिले के सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों की पड़ताल की जा रही है।