चंपावत। कुमाऊं मंडल के हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपये के गबन के मामले में आरोपित चार एनबीएफसी (गैर बैकिंग वित्तीय कंपनी) कंपनियों के मुख्य आरोपियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है। इन आरोपियों को दबोचने के लिए गठित पुलिस की चार टीमों के भी हाथ अब तक खाली है। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि अब इन आरोपियों को विदेश जाने से रोकने के लिए लोकल सर्कुलर जारी किया गया है।
पिछले साल दिसंबर में डीआईजी अजय रौतेला ने कुमाऊं मंडल के चार पहाड़ी जिलों में (बागेश्वर आठ, पिथौरागढ़ छह, अल्मोड़ा चार और चंपावत तीन) दर्ज 21 मुकदमों में तेजी लाने के लिए चंपावत के एसपी लोकेश्वर सिंह को पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया था। पुलिस की तीन टीमों ने उत्तराखंड के अलावा पंजाब के लुधियाना और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में इन आरोपियों के ठिकानों में दबिश दी, लेकिन फरार होने से आरोपी हाथ नहीं लग सके। आरोप है कि 2013 के बाद पहाड़ के चार जिलों में एनबीएफसी के नाम पर बनी दस से अधिक संस्थाएं आम लोगों की 40 करोड़ से अधिक की राशि डकार कर चंपत हो चुकी हैं। एनबीएफसी किसी योजना के तहत जमाकर्ता से धन एकत्र करती है। बाद में जमाकर्ता को मुनाफे से लेकर कर्ज तक देती है।
विदेश नहीं, देश के भीतर है क्रिस्टल का फरार एमडी
चंपावत। दो दशक पूर्व कई करोड़ रुपये लेकर चंपत हुई क्रिस्टल क्रेडिट कारपोरेशन लिमिटेड (सीसीसीएल) के प्रबंध निदेशक एमसी पाठक देश से बाहर नहीं, देश के भीतर ही है। पहले पुलिस को इस तरह की सूचना मिल रही थी कि आरोपी एमडी विदेश में छिपा है। लेकिन प्रवर्तन (इमीग्रेशन) विभाग से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस का कहना है कि आरोपी देश के भीतर ही है। अलबत्ता उसकी लोकेशन अभी पता नहीं है।
एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि आरोपी को मिला प्रोसेडिंग स्थगनादेश खारिज होने के बाद पुलिस ने धरपकड़ के लिए प्रयास तेज किए हैं। पहले आरोपी के देश से बाहर छिपने की सुगबुगाहट थी। लेकिन अब पता चला है कि आरोपी विदेश में नहीं, देश में ही है। उसके ठिकाने का पता कर जल्द दबोचा जाएगा। आरोप है कि पाठक ने क्रिस्टल कारपोरेशन के जरिये कई जगह शाखाएं खोल अधिक ब्याज का प्रलोभन देकर कई योजनाओं में निवेश कराया था। लेकिन 2001 में क्रिस्टल के एकाएक बंद होने से पूरे मंडल में लोगों की कई करोड़ की जमा पूंजी कंपनी में फंस गई थी। निदेशक और दो अन्य लोगों पर आर्थिक धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज हुआ था। इसमें अदालत ने निदेशक को छोड़कर दो अन्य आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया था। लेकिन आरोपी निदेशक तबसे फरार चल रहा है।