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आज खुलेगा राष्ट्रीय राजमार्ग

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निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग का स्वांला के पास का एक नजारा। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग सोमवार को छोटे वाहनों के लिए खुल जाएगा। स्वांला के पास काफी मलबा आने से यह मार्ग पिछले 13 दिसंबर से बंद था। दस दिन तक रात-दिन काम करने के बाद स्वांला में जमींदोज हुए सड़क के करीब 150 मीटर हिस्से को ठीक किया जा सका है। खाई की तरफ से ड्रिलिंग के जरिये चौड़ाई व सुरक्षा दीवार बना सड़क को दुरस्त किया है। लेकिन मार्ग की चौड़ाई बड़े वाहनों के लिए सुरक्षित न होने से फिलहाल इस पर बस, ट्रक व अन्य बड़े वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा।
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एनएच खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथेला ने बताया कि खाई की तरफ से सुरक्षागत कार्य तकरीबन पूरा कर लिया है। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने बताया कि स्वांला के पास छोटे वाहनों की आवाजाही के साथ ही इस जगह कड़े एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं। 13 दिसंबर से बंद इस मार्ग के बीच सोमवार को पहली बार आवागमन सुचारु होगा। जबकि बड़े वाहनों के लिए आवाजाही 30 दिसंबर से शुरू होने की संभावना जताई गई है। वहीं रविवार को रोडवेज की लोहाघाट से पांच (दिल्ली तीन व देहरादून दो) और चंपावत से दो (लोहाघाट व नैनीताल) बसों का संचालन देवीधुरा हल्द्वानी होते हुए किया गया।
मलबे में दबी पोकलैंड को निकालने में चोटिल हुआ ऑपरेटर
चंपावत। स्वांला के पास शनिवार को मलबे में दबी पोकलैंड मशीन को निकालने के लिए लगाई गई जेसीबी असंतुलित होकर पलट गई। शनिवार देर रात जेसीबी पलटने से ऑपरेटर अन्नू राणा चोटिल हुआ। ऑपरेटर को आधी रात को चंपावत जिला अस्पताल लाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सुबह छुट्टी दे दी गई।
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दस दिन में 40 लाख की चपत
चंपावत। 13 दिसंबर से एनएच के बंद होने से चंपावत के कारोबार पर भारी चपत लगी है। इस दौरान एनएच पर स्थित गांवों के लोगों की चंपावत को आवाजाही भी कमोबेश बंद रही।
व्यापार संघ अध्यक्ष अमरनाथ सक्टा और पूर्व पालिकाध्यक्ष व प्रमुख व्यापारी प्रकाश तिवारी का कहना है कि इस दौरान चंपावत मोटर स्टेशन क्षेत्र के कारोबारियों का 40 लाख रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है। मिठाई, मौसमी फल सहित भोजनालयों पर खासतौर पर मार पड़ी। वहीं रोडवेज के लोहाघाट व टनकपुर डिपो को भी इस अवधि में 52 लाख रुपये से अधिक के राजस्व की क्षति हुई है। साथ ही टनकपुर जाने वाले यात्रियों को रीठा साहिब होते हुए यात्रा करने के चलते 200 रुपये के बजाय 400 से 500 रुपये किराया देना पड़ा। अलबत्ता रसोई गैस सिलिंडर, सब्जियों व अन्य जरूरी सामग्री के देवीधुरा या रीठा साहिब होते हुए पहुंचने से खाद्यान्न और आवश्यकीय सामग्री की कमी नहीं रही।
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