सिस्टम को जंग लग गया है या वह जानबूझकर आंखें मूंदे है! लधिया और रतिया नदी किनारे बसे श्रीरीठा साहिब में धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन न उसे दिखता है और न ही इसकी कोई जानकारी है। यह हाल तब हैं, जब इस इलाके में पटवारी चौकी और पुलिस थाना दोनों है।
दोनों महकमों को यहां हो रही अंधेरगर्दी की भनक तक नहीं है।
लधिया और रतिया नदी में धड़ल्ले से कई महीनों से रेता, बजरी, रोड़ी और पत्थर की चोरी हो रही है। आरोप है कि श्रीरीठा साहिब, गागरी, कुलियालगांव, मछियाड़ आदि गांवों से होने वाले अवैध खनन के काम में कई रसूखदार शामिल हैं। माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद है कि नदी किनारे रेता छानने के लिए छान भी लगाई गई है।
पिकप और दूसरे वाहनों से इस सामग्री को निर्माण कार्यों के अलावा बेचा जा रहा है।
भिंगराड़ा, धूनाघाट, पाटी के अलावा चंपावत जिले की सीमा से लगे नैनीताल जिले के पद्मपुर, मीडार, तल्ला अमजड़, मल्ला अमजड़, पतलोड आदि तक यहां की खनन सामग्री भेजी जा रही है। दिन से ज्यादा इस काम को रात में अंजाम दिया जा रहा है।
लेकिन खनन के इस अवैध धंधे को रोकने के लिए कहीं कोई इंतजाम नहीं है।
प्रभावशाली लोगों के इस काम में लिप्त होने से गांव के लोग आमतौर पर जुबान खोलने से हिचकते हैं। ग्रामीणों ने सिर्फ एक बार पुलिस को अवैध खनन की शिकायत का पत्र भेजा था।
वहीं प्रशासन भी इस मामले से बेखबर है। अवैध खनन सामग्री का निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने से रॉयल्टी के रूप में सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है।