भौगोलिक रूप से दुरूह चंपावत सीट पर मैदानी क्षेत्र में चुनाव का शोरगुल सबसे ज्यादा है। खासकर इस बार मनिहारगोठ आदि मुस्लिम बहुल इलाके में नजारा बदला है। पहली बार काफी घरों में कांग्रेस समेत भाजपा के झंडे भी लगे हैं। लोगों की चुनावी बहस के बीच प्रचार की भी खूब धूम है।
विधानसभा के 87297 वोटरों में से सात हजार से अधिक मतदाता मुस्लिम हैं। मैदानी क्षेत्र में मनिहारगोठ, टनकपुर, बनबसा में मुख्य रूप से इस वर्ग के वोटर हैं। बड़ी संख्या में वोट करने की खूबी के चलते मुस्लिम समाज को लुभाने के लिए दोनों प्रमुख दलों के कार्यकर्ता पूरी ताकत झोंक रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी कैलाश चंद्र गहतोड़ी यहां एक सभा कर चुके हैं। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार हेमेश खर्कवाल भी एक बार यहां आ चुके हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का 12 फरवरी को टनकपुर दौरा प्रस्तावित है। कांग्रेस वोटरों को अपने खेमे में बनाए रखने के लिए घर-घर बुजुर्गों से संपर्क साध रही है। मुस्लिम समाज के लोग भी शिक्षा, रोजगार की बात करते नजर आए।
15 फरवरी को वोटिंग से महज चार दिन पूर्व तक मैदान का सियासी माहौल भी मौसम की तरह गर्म है। ब्राह्मण बहुल (43 प्रतिशत) इस सीट पर दोनों प्रत्याशी इसी जाति से हैं। इसके चलते इस वर्ग के वोट दो हिस्सों में बंटने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में मुस्लिम समाज पर टकटकी लगी है। कांग्रेस के टनकपुर मंडल अध्यक्ष याकूब अंसारी के सात फरवरी को पार्टी छोड़ने से कांग्रेस को झटका मिला है। कुछ साल पूर्व कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए मनिहारगोठ के पूर्व प्रधान अमजद हुसैन भी मुसीबत बने हैं।
मैदान से ताल्लुक रखने वाली कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मोहन राम सहित सात बड़े नेताओं के कांग्रेस को छोड़ भाजपा में जाने से तगड़ी बगावत हुई है। वर्ष 2012 के चुनाव में दूसरे नंबर पर आए बसपा प्रत्याशी मदन सिंह महर के इस बार भाजपा में आने से समीकरण अनुकूल होने की उम्मीद है। वहीं, कांग्रेस अपने इस गढ़ में पहली बार सेंधमारी के खतरे से दो-चार है। अपनी इस मजबूत जमीन को बचाने के लिए पार्टी रणनीति बना रही है।
मुस्लिमों से भरोसेमंद रिश्तों की दलील के अलावा इलाके के कुछ बड़े मुस्लिम नेताओं के जरिए वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए कांग्रेस होमवर्क कर रही है। कांग्रेस को उम्मीद है कि मतदान के दिन तक हालात उसके अनुकूल होंगे।
वहीं, कांग्रेस, भाजपा समेत उक्रांद के कार्यकर्ता भी इस इलाके में प्रचार करते मिले। अहमद हुसैन, रमजानी, ताहिरा, रूबी खातून, अख्तर हुसैन, हसमत हुसैन, रौनक अली, आबिद हुसैन आदि अब सुरक्षा के अलावा स्वरोजगार, खुद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते दिखे। कहते हैं कि वोट के लिए सुबह से शाम तक सभी आ रहे हैं। पलटकर पूछते हैं, क्या चुनाव बाद भी वे हमारी सुध लेंगे।
चंपावत विधानसभा
कुल मतदाता : 87297
मुस्लिम वोटर : 7173
2012 विधानसभा चुनाव परिणाम
हेमेश खर्कवाल कांग्रेस : 20312
मदन सिंह महर बसपा : 13317
हेमा जोशी भाजपा : 8610
विधानसभा चुनाव 2017 के प्रत्याशी
भाजपा : कैलाश चंद्र गहतोड़ी।
कांग्रेस : हेमेश खर्कवाल।
उक्रांद : त्रिलोक सौराड़ी।
बसपा : दिनेश चौड़ाकोटी।
चंपावत विधानसभा सीट की भौगोलिक स्थिति
चंपावत सीट प्रदेश की बेहद दुरूह सीटों में से एक हैं। 87 प्रतिशत हिस्सा पहाड़ी है, जबकि 13 प्रतिशत भाग मैदानी (टनकपुर-बनबसा) है, लेकिन वहां 47 प्रतिशत वोटर हैं, जबकि पहाड़ के 53 गांवों में पहुंचने के लिए पैदल दूरी नापनी पड़ रही है।