गुरुनानक जयंती पर गुरुद्वारे को आकर्षक तरीके से सजाया गया है। यहां लखनऊ
के गुरुमीत सिंह और दिल्ली के परमजीत सिंह भुर्जी के नेतृत्व में श्रीगुरु
ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ की लड़ी शुरू कराई गई है। जिसका बुधवार को महाभोग
लगेगा। यहां भजन, कीर्तन का दौर शुरू हो गया है।
सदियों पहले श्रीगुरुनानक के चरण रीठासाहिब में पड़े थे। तब से यह स्थान देश, विदेश के लोगों के लिए आस्था, श्रद्धा का केंद्र है। गुरुनानक मानसरोवर यात्रा के बाद इस स्थान में एक सप्ताह तक रुके थे। उन्होंने तब यहां रह रहे सिद्धों से शास्त्रार्थ किया। अपनी आध्यात्मिक शक्ति के बल पर कड़वे रीठे में मिठास भर दी थी।
जब गुरु महाराज प्रवचन कर रहे थे, तभी उनके चेले मरदाना को भूख लगी। गुरुनानक ने सामने खड़े रीठे के पेड़ से फल खाने को कहा। उनकी दृष्टि जिस डाल पर पड़ी थी, उस डाल के रीठों में छुहारे जैसा स्वाद आ गया। तब से यहां के रीठों में मिठास है।
प्रसाद के रूप में भी यहां मीठा रीठा ही दिया जाता है। आज इस स्थान में प्रतिवर्ष लाखों लोग गुरुनानक की आध्यात्मिक शक्ति के चमत्कार को नमस्कार करने आते हैं। यहां 55 वर्ष पूर्व एक छोटे से शेड में गुरुद्वारे की स्थापना की गई थी। 16 वर्ष पूर्व यहां गुरुद्वारे के भवन की शुरुआत की गई।
जिसमें करोड़ों रुपये खर्च कर यहां तीर्थयात्रियों के आवास, भोजन आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध की गई हैं। करीब दो सौ कमरे, सराय हॉल समेत बिस्तर भी है। गुरुद्वारा प्रबंधक बाबा श्याम सिंह के कार्यभार संभालने के बाद गुरुद्वारे में तीर्थयात्रियों की संख्या, सुविधा बढ़ी है।