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डॉक्टरों का हड़ताली एनएचएम कर्मियों को नैतिक समर्थन

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अपनी मांगों को लेकर लोहाघाट में पूर्व जिपं अध्यक्ष खुशाल अधिकारी को ज्ञापन सौंपते एनएचएम कर्मी। - फोटो : LOHAGHAT
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चंपावत/लोहाघाट। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) संविदा कर्मचारी संगठन की नौ सूत्री मांगों के समर्थन में विधायक कैलाश गहतोड़ी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। वहीं अब डॉक्टरों ने भी इन कर्मियों की मांगों को वाजिब बताते हुए नैतिक समर्थन दिया है।
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नैतिक समर्थन देने वालों में सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी, एसीएमओ श्वेता खर्कवाल, डॉ. मनीष बिष्ट, आभाष सिंह, जुनैद कमर, मंजीत सिंह, कुलदीप यादव, जितेंद्र जोशी, अमित यादव, ज्ञानेश्वर यादव, अरुण वर्मा, विनय यादव, सतीश पिंगल, डॉ. आशीष खर्कवाल, एलडी जोशी, अंकुर आदि शामिल हैं।
इधर एनएचएम कर्मी शुक्रवार को चौथे दिन भी पूर्ण कार्य बहिष्कार के बाद होम आइसोलेशन में रहे। एनएचएम कर्मचारी संगठन के जिलाध्यक्ष प्रेमबल्लभ भट्ट, संरक्षक संजय पांडेय और सलाहकार गौरव पांडेय ने बताया कि नौ सूत्री मांगों में से अभी तक सिर्फ एक मांग लॉयल्टी बोनस को ही मंजूरी मिली है। लेकिन कर्मी सभी मांगों पर ठोस कार्रवाई हुए बगैर काम पर वापस नहीं लौटेंगे। वहीं लोहाघाट में डॉ. मुकेश तड़ागी, डॉ. अरुण मिश्रा, डॉ. प्रीति जुकरिया, निर्मला पुनेठा, प्रियंका बहुगुणा आदि एनएचएम कर्मियों ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी को ज्ञापन दिया। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एनएचएम कर्मियों की मांगों का समर्थन करते हुए धरना दिया। धरने में भगीरथ भट्ट, योगेश मेहता, कविराज मौनी, प्रकाश माहरा, शुभम ढेक, विमलेश थापा ने कर्मियों का समर्थन दिया।
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ये हैं मांगें:
नियमितीकरण, सेवा नियमावली लागू करना, आउटसोर्स के आधार पर नियुक्ति के आदेश को निरस्त करना, स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों का 50 प्रतिशत एनएचम कर्मियों से भरना, कोविड काल में मृत कर्मियों के आश्रितों को नौकरी, गोल्डन कार्ड की सुविधा, बोनस, वेतन विसंगति दूर करना और दस प्रतिशत की बढ़ोतरी।
कोट
एनएचएम कर्मी स्वास्थ्य योजनाओं की रीढ़ हैं, लेकिन वाजिब मानदेय तक नहीं देकर इस रीढ़ को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। इस मामले में अविलंब कारगर कदम उठाया जाना चाहिए।
संजय पांडेय, संरक्षक, एनएचएम संविदा कर्मचारी संगठन।
कोट
कोरोना काल में 14 माह तक दिन-रात एक कर सेवा देने वाले एनएचएम कर्मी अपनी उपेक्षा से कार्य बहिष्कार को मजबूर हैं। सरकार को उनके इस दर्द को समझते हुए मांगों को मानना चाहिए।
दीपक पनेरू,
एनएचएम कर्मी।
कोरोना जांच और टीकाकरण ही नहीं, गर्भवती महिलाओं को भी हो रही दुश्वारी
चंपावत। कोरोना काल कहे कि या स्वास्थ्य आपदा के वक्त स्वास्थ्य विभाग की धुरी एनएचएम कर्मियों का कार्य बहिष्कार भारी मुसीबत बन गया है। पिथौरागढ़ और चंपावत जिले में 550 कर्मियों के हड़ताल में होने से कोरोना से संबंधित जांच और टीकाकरण की व्यवस्थाएं ही नहीं, योजनागत सेवाओं पर भी असर पड़ा है। पहली जून से कोरोना जांच में 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है।
संविदा कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष प्रेमबल्लभ भट्ट कहते हैं कि एनएचएम राष्ट्रीय स्तर की 42 महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करता है। जिले में इस काम के संचालन के लिए 12 डॉक्टर, 11 फार्मासिस्ट, 19 स्टाफ नर्स, 7 एएनएम, 10 लैब तकनीशियन, 29 सीएचओ, 15 डीईओ और 47 परियोजना से संबंधित प्रबंधक व सहायक प्रबंधक हैं। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि उनकी हड़ताल से कई योजनाएं ठप हैं। गर्भवती महिलाओं का इलाज, प्रसव, टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। कोविड टीके और जांच पर 40 प्रतिशत असर पड़ा है। गांवों में जांच के लिए जाना कठिन हुआ है। विभिन्न पोर्टल पर आंकड़ों की प्रविष्टि व अपडेशन कार्य, दैनिक रिपोर्टिंग, कोविड सैंपलिंग लैब जांच, कांटेक्ट ट्रेसिंग और टेस्टिंग, होम आइसोलेशन ड्यूटी आदि पर सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा टेली मेडिसन सिस्टम से लेकर अस्पतालों में संचालित परामर्श सेवाओं पर भी असर पड़ा है। संगठन का कहना है कि ऐसे स्वास्थ्य आपदा में वे हड़ताल पर नहीं जाना चाहते थे, लेकिन डेढ़ दशक से हो रही अनदेखी ने उनके सामने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है।
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