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आपदा से प्रभावित हुए मार्गो की जल्द से जल्द मरम्मत करें

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चंपावत जिला सभागार में पीएमजीएसवाई की समीक्षा बैठक लेते डीएम विनीत तोमर। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। डीएम विनीत तोमर की अध्यक्षता में शनिवार को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) एवं राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड के कार्यों की समीक्षा बैठक हुई। इसमें डीएम ने चंपावत और लोहाघाट खंड के अधिशासी अभियंताओं से कार्य में तेजी लाकर समय से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने अक्तूबर 2021 में आई आपदा से हुए नुकसान एवं उसकी अनुरक्षण संबंधी कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आपदा से हुए नुकसान से प्रभावित मार्गों की जल्द मरम्मत करें। उन्होंने सौंपे गए कार्यों को तेजी से कर अगले माह तक लक्ष्य प्राप्ति के भी निर्देश दिए। कहा गया कि सभी कार्यों, जिसमें पूर्ण और अधूरे कार्य हैं, उनकी भौतिक रिपोर्ट प्रतिशत के साथ भेजी जाए। बैठक में सीडीओ आरएस रावत, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी दीप्तकीर्ति तिवारी, पीएमजीएसवाई के ईई अरविंद प्रसाद जोशी, ईई जेसी थपलियाल, एई वैभव गुप्ता, राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम से एजाज बालियान आदि मौजूद रहे।
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निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
पिथौरागढ़। वन भूमि हस्तांतरण के लंबित प्रकरणों, वनाग्नि की रोकथाम और कृत्रिम झील निर्माण के लिए डीएम डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने वन भूमि हस्तांतरण के लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण कर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
जिला सभागार में शनिवार को हुई बैठक में डीएम डॉ. आशीष चौहान ने एसडीएम धारचूला को रांथी सड़क मार्ग, बीआरओ के लिए जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने रेडक्रॉस के लिए चयनित जमीन को हेलिपैड के लिए उपयुक्त बताया। उन्होंने निर्देशित किया कि सड़क निर्माण कार्यों में पेड़ों का कम से कम संख्या में कटा जाए। डीएम ने ईई अस्कोट को समय से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि अगर कार्य समय से पूरा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के वेतन आहरण पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने सभी अधिशासी अभियंताओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान निकलने वाली खनन सामग्री के उपयोग के लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम से अनुमति ली जाए। खनन कार्य के लिए जो समय दिया जाएगा, उसी समय अंतराल में ही खनन का कार्य किया जाए।
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डीएम ने जंगल की आग रोकने के लिए उपलब्ध संशोधनों और कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने जंगलों के आसपास सूखी घास, पिरूल, लकड़ी, डामर सामग्री आदि ज्वलनशील पदार्थ, सामग्री की 28 फरवरी तक अच्छी तरह से सफाई करने के निर्देश दिए। स्थानीय क्षेत्रों में कार्यरत महिला, युवक मंगल दल और अन्य टीमें तैयार कर लें और एक-दूसरे को फोन नंबर भी उपलब्ध कराएं। ताकि आग लगने की स्थिति में समय पर जानकारी दी सके और आग पर नियंत्रण पाया जा सके। उन्होंने वन क्षेत्राधिकारियों को चीड़ से आच्छादित क्षेत्र को चिह्नित कर वनाग्नि नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आग बुझाने के लिए आवश्यक उपकरणों की भी समय से खरीदने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि बारिश का पानी रुकने वाले स्थानों को कृत्रिम झील के रूप में विकसित किया जाएगा।
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