मां नंदा-सुनंदा महोत्सव में बृहस्पतिवार शाम को कदली वृक्ष को आमंत्रण की रस्म अदा की। भक्तों ने तल्लीहाट, मल्लीहाट, नागनाथ, राजबुंगा होते हुए रोरुयूड़ा में कदली वृक्ष को आमंत्रण दिया।
देवडांगर हरीश पांडेय, देवी लाल वर्मा, विवेकानंद बिष्ट, गौरव वर्मा, सौरभ वर्मा, मोहनी साह, मंजू राय, तारा पटवा, गुड़िया वर्मा, रीता तड़ागी, अनीता साह, रवि पटवा, शांति पटवा आदि कदली वृक्ष को आमंत्रण देने गए। देर रात तक भजन-कीर्तनों से माहौल भक्तिमय बना रहा। इससे पूर्व सुबह बालेश्वर मंदिर में मां नंदा-सुनंदा की पूजा-अर्चना की गई।
पुरोहित गिरीश कलौनी, दीपक कुलेठा और हरीश जोशी ने धार्मिक अनुष्ठान किए। पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा, महोत्सव समिति के अध्यक्ष शंकर पांडेय, देवी लाल वर्मा, दिनेश पटवा, विकास साह, एनडी गड़कोटी, रितेश राय, प्रकाश पांडेय, सुरेश पांडे, निर्मल पुनेठा, प्रेमा पांडेय, मेनका साह, मुन्नी पांडेय, हेमा पटवा आदि ने पूजा-अर्चना की। शाम को अमित वर्मा, हरविनोद पंत, नरेश बोहरा, पूनम वर्मा ने छात्रों की निबंध और कला प्रतियोगिता कराई।
कांछ तेरो जलेबी को डाब, अकेली कलां खांछी जरा हालदे म्यर खाप ओ हिमा जाग...
लोहाघाट (चंपावत)। पाटन-पाटनी, राईकोट महर और राईकोट कुंवर के मां झूमाधुरी नंदाष्टमी महोत्सव में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मची है। महोत्सव की दूसरी शाम कुमाऊं लोक सांस्कृतिक कला दर्पण लोहाघाट, संस्कृति कला केंद्र रामनगर के नाम रही। इस दौरान कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को बांधे रखा।
बुधवार की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि बाराकोट के निवर्तमान ब्लाक प्रमुख निर्मल माहरा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। महोत्सव समिति अध्यक्ष मोहन पाटनी के दिशा-निर्देशन, चांद सिंह बोहरा की अध्यक्षता और शशांक पांडेय के संचालन में कला दर्पण लोहाघाट के दल नायक भैरव राय के नेतृत्व में आए कलाकारों ने जय भगवती मैया तू दैंण है जाए वंदना से कार्यक्रमों की शुरुआत की। गायक प्रदीप कुमार ने कांछ तेरो जलेबी को डाब, अकेली कलां खांछी जरा हालदे म्यर खाप ओ हिमा जाग की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।
गायिका बेबी प्रियंका ने सुन ले दगाड़िया बात सुनी जा, सलोनी विश्वकर्मा ने छम्मा छम्मा बाजे रे मेरी पैजनिया, सुषमा पांडेय ने हरियाणवी गीत तेरी अंखियों का यो काजल गीत पर धमाल मचा दिया। संस्कृति कला केंद्र रामनगर के कलाकारों ने नंदू मामा की साली कमला, गोरी मुखड़ी सजदी नाक में यो नाथुली, ओ भिना कसीके जानू झूमाधुरी गीत प्रस्तुत किया।
इस दौरान डॉ. कुंदन सिंह मेरोला और जगदीश कन्याल ने जरूरतमंद लोगों को कंबल बांटे। इस मौके पर सुभाष विश्वकर्मा, गंगा पाटनी, प्रकाश बोहरा, सचिन जोशी, श्याम चौबे, राकेश करायत, भुवन चौबे, सचिन विश्वकर्मा, लोकेश पांडेय, शेखर विश्वकर्मा, मनीष पाटनी, पवन पाटनी, बसंत विश्वकर्मा, शिवम पांडेय, पंकज पाटनी, रमेश पाटनी आदि रहे।
महोत्सव में हुईं कई प्रतियोगिताएं
लोहाघाट (चंपावत)। मां झूमाधुरी नंदाष्टमी महोत्सव में हुई प्राथमिक वर्ग सुलेख प्रतियोगिता में भावना जोशी, प्रियांशु कुमार, कशिश बिष्ट, जूनियर वर्ग में मिताली कुंवर, शरद कुमार, संजना कुंवर, जीके प्राथमिक वर्ग में मयंक जोशी, अमन सिंह, आयुष, जूनियर में दीपक धौनी, सोमेश मेहरा, मानस जोशी, क्रास कंट्री बालक वर्ग में अमित कुमार, सौरभ, जीवन सिंह, बालिका में निकिता पाटनी, मानसी बिष्ट, निशा, ओपन क्रास कंट्री में जीवन सिंह, मदन सिंह, कमल राम, भाषण में संजना, पंकज सिंह, कामेश पाटनी क्रमश: पहले तीन स्थान पर रहे।
शतरंज में साहिल ढेक विजेता और प्रशांत ढेक उप विजेता रहे। निर्णायकों में सुंदरनाथ गोस्वामी, नवीन पाटनी, पुष्कर गिरि, शेखर चंद्र, भूपेश पाटनी, भूवन सिंह बोहरा, पंकज बोहरा आदि ने सहयोग किया।
महोत्सव में आज:
झूमाधुरी महोत्सव का मुख्य आकर्षण शुक्रवार को पाटन-पाटनी और राईकोट महर गांवों से निकलने वाली मां भगवती और मां महाकाली की भव्य डोला यात्राएं होंगी जो दोपहर दो बजे बाद रस्सों के सहारे पहाड़ी पर स्थित मां झूमाधुरी मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगी। श्रद्धालुओं के लिए पूर्व जिला पंचायत सदस्य सचिन जोशी और सुनील चौबे की ओर से प्याऊ की व्यवस्था की जाएगी।
नि:संतान महिलाओं की गोद भरती है मां झूमाधुरी
लोहाघाट (चंपावत)। नगर से लगभग चार किमी दूर उत्तर दिशा में पांच हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मां झूमाधुरी के मंदिर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। यहां सच्चे मन से मां की आराधना करने आईं नि:संतान महिलाएं अपनी मनोकामना पूर्ण कर जाती हैं।
नंदाष्टमी के अवसर पर यहां मेला आयोजित होता है। इससे पूर्व संध्या पर यहां रात भर देवी जागरण होता है जिसमें बड़ी तादाद में लोग अपनी मनौतियां पूरी करने के लिए आते हैं।
मां भगवती की अनन्य उपासक साध्वी झूमादेवी के नाम पर ही मंदिर का नाम झूमाधुरी रखा गया था।
किवदंती है कि पाटन गांव के एक नि:संतान राज मिस्त्री को स्वप्न में यहां मंदिर बनाने की प्रेरणा मिली। राज मिस्त्री ने स्वप्न के इस राज को गांव के अन्य लोगों में साझा किया। यहां लोगों द्वारा मंदिर स्थापना के साथ भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी व अष्टमी को मेला आयोजित किया जाने लगा। लगभग दो किमी लंबी सीधी चढ़ाई पार करने के बाद झूमाधुरी के पर्वत शिखर पर पहुंचने पर यहां से कुदरती नजारा देखने से व्यक्ति अपनी थकान भूल जाता है।
झूमाधुरी महोत्सव में आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता में अव्वल रहे प्रतियोगियों को पुरस्कृत करते आय?- फोटो : LOHAGHAT
झूमाधुरी महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं छात्राएं।- फोटो : LOHAGHAT
चंपावत के नंदा-सुनंदा महोत्सव में कदली वृक्ष को न्यौता देते देव डांगर।- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत के मां नंदा-सुनंदा महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठान करते श्रद्धालु।- फोटो : CHAMPAWAT