धौन के समीप चट्टान की चोटी में जान खतरे में डालकर काम करते एनएच के मजदूर।
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पहाड़ की लाइफ लाइन माना जाने वाला टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बुधवार की रात से बंद था। रोड खुलने तक करीब 43 घंटें तक यात्रियों को तो भारी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा। इन सबके बीच सड़क खोलने में एनएच खंड को भी कम पापड़ नहीं बेलने पड़े। रोड खोलने के लिए मशीन के साथ मजदूरों की मदद भी ली गई। अस्थाई तौर पर रखे गए मजदूर जान हथेली पर रख कर काम करते रहे। लेकिन इन मजदूरों को बीते पांच माह से वेतन तक नसीब नहीं हो पा रहा है।
जान जोखिम में डाल सड़क खोलने में जुटे मेट हेतराम, मोतीराम, गिरधारी दत्त, दीवानी राम, डिकर देव और उमेश चंद्र का कहना है कि उन्हें जनवरी तक ही वेतन मिल पाया है। वे बीते पांच माह से वेतन के लिए तरस रहे हैं। एनएच में धौन और बनलेख के बीच छतकांडा में नया खतरा बना है। इस खतरनाक जगह की ऊंचाई करीब 150 फीट है। इसी पहाड़ की चोटी में सात मजदूर जान-जोखिम में डाल पत्थर और मलबा नीचे गिराते रहे। एनएच पर करीब 20 फीट की चौड़ाई में सड़क पर मलबा गिरता रहा। इस मलबे को साफ करना बेहद जोखिम भरा बना था। लगातार गिर रहे मलबे को सड़क से हटाना खतरे से खाली नहीं था। बावजूद इसके एनएच के मजदूर और जेसीबी चालक लगातार जोखिम उठा कर सड़क खोलने में जुटे हुए हैं। 2015 में इस मोटरमार्ग को सीमा सड़क संगठन से हटा कर एनएच को सौंपा गया। बीआरओ से जुड़े 8 मेट और 52 मजदूरों को एनएच में रखा गया।
कोट
विभाग में आउट सोर्सिंग से रखे गए मजदूर जान जोखिम में डालकर सड़क खोलने में जुटे हैं। इन मजदूरों के वेतन के लिए बजट की मांग की गई है। बजट मिलते ही मजदूरों का भुगतान कर दिया जाएगा।
एमसी पांडेय,सहायक अभियंता,राष्ट्रीय राजमार्ग खंड लोहाघाट।
कई बार बाल-बाल बचे जेसीबी चालक
चंपावत। धौन-बनलेख के बीच बंद मार्ग को खोलने में जेसीबी के चालक बलदेव भट्ट ने अहम रोल अदा किया। लगातार गिर रहे मलबे को हटाने में चालक ने अपनी जान की परवाह भी नहीं की। कई बार उनके ऊपर मलबा गिरते-गिरते बचा। लेकिन उन्हें भी बीते पांच माह से वेतन नहीं मिला है। बुधवार को ही बलदेव की बेटी हुई है। लेकिन फिर भी वे रोड को खोलने के काम में मुस्तैदी से जुटे हैं।