बुधवार रात 9.30 बजे बाद से बंद टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) ने लगातार दूसरे दिन भी लोगों को परेशान किया। अलबत्ता यह मार्ग पूरे 43 घंटे बाद शुक्रवार अपरान्ह 4.30 बजे खुल सका। मार्ग बंद होने से लोगों को काफी परेशानी हुई। मार्ग पर ट्रक, बसें और बड़ी संख्या अन्य वाहनों की लंबी कतार लग गई। एनएच बंद होने से हजारों लोगों दिक्कतें उठानी पड़ी। शुक्रवार सुबह से दो किलोमीटर का खतरनाक पैदल मार्ग पार करने के बाद वाहनों की अदला बदली के जरिए मार्ग पर फंसे लोगों ने अपना अधूरा सफर पूरा किया। इन लोगों के लिए धौन के पास प्रशासन की ओर से पानी व बिस्कुट की व्यवस्था की गई थी। बीती रात चंपावत में भी बड़ी संख्या में लोगों को रहने व खाने के लिए परेशान रहना पड़ा।
जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर धौन के पास छतकांडा के ठुलखोला में आए भारी मलबे से टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के पहिए जाम रहे। इस स्थान पर करीब 150 फीट ऊंचाई से लगातार हो रहे भूस्खलन ने न केवल लंबे समय तक रोड को बंद रखा, बल्कि काम में भी बाधा पहुंचाई। एनएच डिवीजन के अधिशासी अभियंता एलडी मथेला और सहायक अभियंता एमसी पांडेय को मार्ग खुलवाने को बीते दो दिनों से काफी माथापच्ची करनी पड़ी। शुक्रवार को सात मजदूरों को भूस्खलन वाले हिस्से की ऊपरी छोर पर भी भेजा गया।
एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, प्रभारी कोतवाल आरएस डांगी, जिला आपदा नियंत्रण अधिकारी मनोज पांडेय सहित कई अधिकारी मौके पर डटे रहे। आखिर शुक्रवार अपरान्ह करीब 4.30 बजे यह मोटर मार्ग आवाजाही के लिए सुचारु हो सका। करीब 43 घंटे बाद सुचारु हुए यह मार्ग बृहस्पतिवार शाम छोटे वाहनों के लिए दो घंटे मार्ग जरूर खुला। राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब 43 घंटे बंद होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। मार्ग बंद होने के बावजूद टनकपुर से भी रोडवेज बसों की आवाजाही जारी होने से भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। अलबत्ता यहां कोतवाली के पास टनकपुर की ओर जा रहे वाहनों को जरूर रोका गया।
लोहाघाट रोडवेज को सात लाख का नुकसान
चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से रोडवेज को भारी नुकसान झेलना पड़ा। राजस्व का सबसे ज्यादा घाटा लोहाघाट डिपो को हुआ। सहायक मंडलीय प्रबंधक नीलिमा शर्मा ने बताया कि लोहाघाट डिपो को दो दिनों में सात लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
देवीधुरा होते हुए भेजी चार बसें
चंपावत।टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से रोडवेज की कई बसें नहीं चल सकी। मार्ग पर15 से अधिक बसें फंसी भी रही। इन बसों के जरिए लोगों को वापस चंपावत, लोहाघाट व पिथौरागढ़ की ओर भेजा गया। डीएम डॉ.अहमद इकबाल द्वारा रोडवेज के एमडी से वार्ता के बाद निगम ने शुक्रवार को लोहाघाट डिपो ने देवीधुरा होते हुए चार बसें भेजी। एजीएम नीलिमा शर्मा ने बताया कि दो बसें हल्द्वानी और एक-एक बस दिल्ली व देहरादून भेजी। इसके अलावा पिथौरागढ़ डिपो की एक बस को देवीधुरा होते हुए देहरादून भेजा गया।
गैस सिलेंडरों के वाहन भी फंसे रहे
चंपावत। दो दिन तक बंद रहे राष्ट्रीय राजमार्ग पर सैकड़ों वाहन फंसे रहे। इन वाहनों में चार वाहन एलपीजी गैस सिलेंडर के भी थे। चंपावत गैस प्रभारी प्रदीप कार्की ने बताया कि चंपावत के सिलेंडरों के दो वाहन फंसे रहे। जिसके चलते बृहस्पतिवार को सिलेंडर नहीं मिल सके। देर शाम ये वाहन यहां पहुंच गए हैं। इसके अलावा लोहाघाट व पिथौरागढ़ की भी सिलेंडरों एक-एक गाड़ी मार्ग पर रहे।
जीआईसी धौन में मुसाफिरों के लिए बना भोजन
चंपावत। राजकीय इंटर कॉलेज धौन के शिक्षकों ने बंद टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर फंसे 300 लोगों को भोजन कराया। एसडीएम सीमा विश्वकर्मा के सुझाव पर प्रभारी प्रधानाचार्य बीबी सिंह ने स्कूल में चावल व दाल बनवाकर फंसे मुसाफिरों को भोजन कराया। शिक्षक एसएस बोहरा, मोहन जोशी, जगतनाथ, नवीन जोशी, नीरज पांडेय, भगवती गहतोड़ी, जीबी पंत, चंदन सिंह अधिकारी आदि ने इस काम में हाथ बंटाया। वहीं जिला पूर्ति अधिकारी एके अग्रवाल व सहायक पूर्ति निरीक्षक प्रकाश फर्त्याल की देखरेख में फंसे यात्रियों को चाय, बिस्कुट व पानी की व्यवस्था कराई गई।