जिले में तीन हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को कायदे से टीकाकरण की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह जिले के कई मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण (एएनएम) केंद्रों में कर्मियों का न होना है। नतीजतन लोगों को 16 से 75 किलोमीटर दूर लोहाघाट या चंपावत की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले के 80 ऑग्जलरी नर्सिंग मिडवाइफ (एएनएम) में से महज 53 ही तैनात हैं। पद खाली होने से 27 केंद्र बंद है। सबसे खराब स्थिति पाटी विकासखंड की है। जहां 21 में से 11 एएनएम केंद्र बंद हैं। केंद्र बंद होने से शिशुओं को टीकाकरण और महिलाओं की देखरेख, स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर डिलीवरी के लिए भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
एएनएम केंद्रों में तालाबंदी के चलते बड़ी संख्या में शिशुओं को वक्त पर टीके लगाने में दिक्कत आ रही है। चौड़ापित्ता की प्रधान पुष्पा बोहरा, क्षेत्र पंचायत सदस्य माया देवी सहित ग्रामीणों का कहना है कि नवजात शिशुओं को टीकाकरण के लिए दूसरे केंद्रों में पहुंचाने को मजबूर होना पड़ रहा है। नवजात शिशुओं को समय-समय पर लगने वाले टीके के लिए भी अन्य केंद्रों में दौड़ लगानी पड़ती है। गर्भवती महिलाओं के लिए डिलीवरी की सुविधा तक नहीं है। इस कारण महिलाओं को डिलीवरी के लिए 16 से 75 किलोमीटर तक का फासला तय करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अब इस बुनियादी सुविधा को लेकर लामबंद हो रहे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य की कई योजनाएं संचालित की जा रही है, वहीं उन्हें मामूली सहूलियत से वंचित रखा जा रहा है। डांडा के सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह ग्रामीण सहित कई नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर एएनएम केंद्रों के नियमित संचालन की मांग की जाएगी।
एएनएम न होने से इन केंद्रों में लटके हैं ताले
मुख्य केंद्र चौड़ामेहता, पाटी, मंच, उप केंद्र चौड़ामेहता, पनिया, मंगललेख, बिनवालगांव, चौड़ाकोट, पीपलढींग, धूनाघाट, सिमलखेत, मूलाकोट, रेगड़ू, मटियाल, बाराकोट, सिमियाउरी, तरकुली, ऊचौलीगोठ, भगानामेहरा, नरसिंहडांडा, गुरौली, धुरा, डांडा, तामली, किमतोली, पुलहिंडोला, मडलक।
एएनएम के काफी पद रिक्त हैं। नई नियुक्ति के लिए विभाग से आग्रह किया गया है। फिलहाल काम चलाने के लिए बंद एएनएम केंद्रों में आसपास की एएनएम को भेजकर काम चलाने का प्रयास किया गया है। -डा.डीएल शाह, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।