सतीश जोशी सत्तू
चंपावत। मुख्यालय के सिमल्टा कांडा क्षेत्र की महिलाएं फूड प्रोसेसिंग के जरिए विभिन्न प्रकार के स्थानीय उत्पाद तैयार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाओं की ओर से स्थानीय उत्पादों को आकर्षक ब्रांडिंग कर बाजार में उतारा जा रहा है, जिसे लोग हाथोंहाथ ले रहे हैं। देहरादून और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी समूह की महिलाओं के स्थानीय उत्पाद काफी पसंद किए जा रहे हैं।
जिले में भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की ओर से महिलाओं को फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में दक्ष बनाया गया है जिसके बाद महिलाओं ने स्थानीय उत्पादों से ही जैम, आचार, जूस, अदरक कैंडी और आंवला कैंडी आदि बनाने में महारत हासिल की है। वन्य जीव संस्थान की ओर से महिलाओं के तैयार विभिन्न उत्पादों को बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक क्षेत्र की 200 से अधिक महिलाओं को फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में दक्ष बनाया जा चुका है। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए स्थानीय उत्पादों को तैयार कर रही हैं। संवाद
मजबूत हो रही है महिलाओं की आर्थिक स्थिति
चंपावत। मुख्यालय के सिमल्टा कांडा में स्वयं सहायता समूह की हीरा देवी, मुन्नी देवी, गीता देवी, मीना देवी, हेमा, चंद्रकला आशा देवी, ज्योति आदि का कहना है कि वन्य जीव संस्थान देहरादून और नमामि गंगे अभियान के तहत सभी महिलाओं ने प्रशिक्षण हासिल किया है। अब महिलाओं का आर्थिक पक्ष मजबूत हो रहा है। संवाद
होम स्टे भी बाजार उपलब्ध कराने में बने मददगार
चंपावत। महिलाओं की ओर से तैयार उत्पादों को जहां देहरादून, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में विक्रय किया जा रहा है। वहीं सिमल्टा कांडा क्षेत्र में पर्यटन विकास विभाग की ओर से बनाए गए होम स्टे भी स्थानीय उत्पादों को बाजार दिलाने में मददगार साबित हो रहे हैं। संवाद