चंपावत। जंगल को आग से बचाने के लिए अब वन विभाग ने जंगलों में लीसे का स्टॉक रखने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। अब समय से चीड़ के जंगलों से लीसे को नजदीकी डिपो तक न पहुंचाने वाले लीसा ठेकेदारों (मेटों) को नोटिस भेजे जाएंगे।
चीड़ के जंगलों में लगने वाली आग के लिए चीड़ से निकलने वाला लीसा बड़ा कारण बनता है। ऐसे में वन विभाग की ओर से फायर सीजन से पहले ही जंगलों से लीसे का उठान कराया जाता है। इसके बाद भी चीड़ के जंगलों से निकाला गया लीसा समय से वन विभाग के डिपो तक नहीं पहुंच रहा है। इससे आग लगने की घटनाओं के बढ़ने के साथ ही लीसा तस्करी की आशंका भी बढ़ रही है। डीएफओ मयंक शेखर झा ने बताया कि विभाग की ओर से ऐसे संबंधित लीसा ठेकेदारों को नोटिस जारी किए जाएंगे, जिन्होंने जंगलों में लीसे का स्टॉक किया है और उसे समय से डिपो तक नहीं पहुंचाते हैं। देवीधुरा रेंज के रेंजर सुनील शर्मा ने बताया कि वन विभाग की ओर से अभियान चलाकर जंगलों में गश्त और जांच की जा रही है। इस दौरान किसी भी प्रकार से अवैध रूप से लीसे का प्रयोग मिलने पर संबंधित के खिलाफ लीसा अधिनियम 1976 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कई वारदातों में चकमा देकर फरार हो चुके हैं आरोपी
चंपावत। वन विभाग की ओर से लीसा तस्करी की घटनाओं पर अंकुश लगाने संबंधी प्रयासों के बाद भी तस्करी की वारदातों में शामिल आरोपी विभाग के हत्थे नहीं चढ़ पा रहे हैं। विभिन्न रेंजों में हुई करीब आधा दर्जन से अधिक वारदातों में आरोपी उन्हें पकड़ने गई वन विभाग की टीम को चकमा देकर फरार हो चुके हैं।