पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। मुख्यमंत्री की ओर से की गई घोषणा पर ही अमल न हो तो अन्य के बारे में सोचना ही बेकार है। मां पूर्णागिरि धाम की पेयजल योजना का भी यही हाल है। सीएम की घोषणा के ढाई साल बाद भी इस योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। आलम यह है कि इसकी निविदा की प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी है।
मां पूर्णागिरि धाम चंपावत जिले को पर्यटन मानचित्र में जगह दिलाता है। यहां हर साल 40 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन करते हैं लेकिन पेयजल की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। पेयजल के समाधान के लिए तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अक्तूबर 2019 में मां पूर्णागिरि धाम (गुरुत्व) योजना बनाने की घोषणा की थी। करीब चार करोड़ रुपये की इस योजना में काम शुरू होना तो दूर इसकी निविदा प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी है। पिछली बार निविदा प्रक्रिया आगणन से अधिक राशि डालने से खारिज हो गई।
पेयजल योजना के लिए पिछली बार निविदा मंजूर नहीं हो सकी थी। इस महीने दोबारा निविदा निकाली जाएगी। तकनीकी निविदा अनुमोदित करने वाले ठेकेदारों को वित्तीय निविदा के लिए अनुमन्य किया जाएगा। निविदा की स्वीकृति के बाद अनुबंध बनाकर काम कराया जाएगा।
- वीके पाल, ईई, पेयजल निगम, चंपावत।
धामी ने भी किया लादीगाड़ पंपिंग योजना का एलान
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी इस साल दो अप्रैल को देवी दर्शन के बाद पूर्णागिरि क्षेत्र के लिए लादीगाड़ पंपिंग योजना की घोषणा की है। इस योजना के क्रियान्वित होने से पानी की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी।
जल स्रोत सूखने से बढ़ा पानी की किल्लत
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। मां पूर्णागिरि धाम में होली के बाद तीन महीने तक सरकारी मेला चलता है। मेला अवधि में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस वक्त धाम में निगालीगाड़, भवानीगाड़, पूर्णागिरि स्रोत से जलापूर्ति हो रही है लेकिन स्रोत दूर होने के साथ गर्मी और तपिश की वजह से जलस्तर में कमी आने से पेयजल किल्लत बढ़ी है। वहीं जल संस्थान के ईई बिलाल यूनुस का कहना है कि विभाग पेयजल लाइन के अलावा अन्य वैकल्पिक उपायों के जरिये व्यवस्था बना रहा है।