नियम लोगों के लिए हैं या लोग नियमों के लिए? यह सवाल इन दिनों टनकपुर से आठ किलोमीटर दूर बस्टिया गांव के नागरिक पूछ रहे हैं। पहाड़ में रात में आवाजाही प्रतिबंधित है। और यह रोक दुर्घटनाओं से बचाव के मद्देनजर सही भी है। मगर सात फरवरी को स्वांला में हुई भीषण जीप दुर्घटना के बाद से राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसे बस्टिया गांव के लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है।
पहाड़ के साथ ही बस्टिया के लोगों को भी प्रतिबंधित वक्त में आवाजाही नहीं करने दी जा रही है। इसे लेकर ग्रामीण बृहस्पतिवार को प्रशासन को ज्ञापन देकर नियमों के तर्कसंगत उपयोग की दलील दे चुके हैं, मगर फिलहाल उनकी दिक्कतों का समाधान नहीं हो सका है।
शक्तिमान चलाने वाले अरुण कुमार (30) को शुक्रवार को करीब 7.45 बजे बाइक से ककरालीगेट बैरियर पर पहुंचे, मगर उन्हें बस्टिया जाने के लिए भारी माथापच्ची करनी पड़ी। प्रतिबंधित समय में आने के चलते बाइक से उन्हें बैरियर पार नहीं करने दिया गया। इसके चलते वे रात को काफी देर में किसी तरह घर पहुंचे। ऐसी ही परेशानी कुछ अन्य लोगों को भी झेलनी पड़ी।
करीब एक हजार की आबादी वाली बस्टिया ग्राम पंचायत का टनकपुर से आठ और ककरालीगेट बैरियर से छह किमी का फासला है। ज्यादातर पुरुष कामधाम के लिए टनकपुर आते हैं। आठ लोग शक्तिमान व जीप चलाते हैं, तो कुछ लोगों की दुकान है। बस्टिया गांव में आठ चौपहिया वाहन के अलावा 36 बाइक हैं। लोग कारोबार से लेकर इलाज तक के लिए टनकपुर पर आश्रित हैं। मगर रात को 10 घंटे (रात सात बजे से सुबह पांच बजे तक) तक वाहनों की आवाजाही पर रोक से उनके सामने संकट है।
रात को पैदल आवाजाही से जंगली जानवरों का खतरा है। बीते एक साल में दो महिलाओं को तेंदुआ मौत के घाट उतार चुका है। अभी तक यह तेंदुआ वन महकमे के हत्थे चढ़ भी नहीं सका है। टनकपुर में फोटोग्राफी करने वाले बस्टिया के लोग शादी-ब्याह के चलते काफी रात में घर पहुंच पाते हैं। ऐसे में अब उन्हें रात घर के बजाय टनकपुर के होटलों में रात काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अनुमन्य यातायात नियमावली का अनुपालन कराया जा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए यह जरूरी है। प्रतिबंधित वक्त में केवल एंबुलेंस सहित कुछ अन्य अनुमन्य वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति है।
हेमंत कुमार वर्मा,
अपर जिलाधिकारी,चंपावत।
रात को वापसी में हो रही दिक्कत
बस्टिया के देव राम का कहना है कि नया आदेश उनके लिए मुसीबत बन रहा है। अब उन्हें टनकपुर या मैदानी क्षेत्र में कहीं भी जाने पर रात को वापस आने की परेशानी होती है। और गर्मियों में ये परेशानी और अधिक बढ़ेगी।
बस्टिया वन चौकी पर लगे पुलिस का बैरियर
बस्टिया के डंबर ओली का कहना है कि अक्सर होने वाली परेशानी से यहां के लोग तंग आ गए हैं। लोगों को इस दुश्वारी से बचाने के लिए ककरालीगेट में लगे बैरियर को बस्टिया वन चौकी में लगाकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।
टनकपुर पर है गांव की निर्भरता
बस्टिया की रुकमणि देवी का कहना है कि गांव के लोगों की मामूली काम के लिए भी निर्भरता टनकपुर पर है। रात को सात बजे बाद वाहनों की आवाजाही की अनुमति नहीं देने से ग्रामीणों के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा।
बस्टिया के लोगों को मिले छूट
सरोजनी देवी कहती हैं कि कामकाज से अक्सर यहां के काफी लोग रात को आठ बजे के बाद पहुंचते हैं। पर्वतीय क्षेत्र के वाहनों को ककरालीगेट से आगे न जाने देना तो ठीक है, मगर इस आदेश से बस्टिया के लोगों को छूट मिलनी चाहिए।
परिचय पत्र दिखाकर जाने दिया जाए:प्रधान
ग्राम प्रधान नवीन बोहरा का कहना है कि स्वांला जीप हादसे के पूर्व यहां के लोगों को परिचय पत्र दिखाकर जाने दिया जाता था। यही व्यवस्था अब भी की जानी चाहिए। ऐसा नहीं होने से वक्त-बेवक्त तक काम करने वाले लोगों को रात टनकपुर के होटलों में काटने को मजबूर होना पड़ेगा।