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150 हेक्टेयर में विकसित होंगे नए चाय बागान

Sat, 10 Feb 2018 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे लोहाघाट (चंपावत)।
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चंपावत में विकसित हुआ चाय बागान। - फोटो : अमर उजाला
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 जिले के विभिन्न स्थानों में उत्पादित की जा रही हरी पत्ती चाय की लगातार बढ़ रही मांग, चाय की खेती में लगे किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर जल्द ही जिले में 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नए चाय बागान विकसित किए जाएंगे। नाबार्ड के सहयोग से जिले में नए स्थानों में चाय बागान स्थापित किए जाएंगे।
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चाय विकास बोर्ड की ओर से चाय बागान के विकास के लिए भेजे गए प्रस्ताव को नाबार्ड की मंजूरी मिल गई है। वर्तमान में चाय विकास बोर्ड की ओर से करीब 210 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चाय का सफलतापूर्वक उत्पादन किया जा रहा है। जिसे बढ़ाकर 400 हेक्टेयर किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड ने बताया कि नाबार्ड की ओर से प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही नए स्थानों पर चाय बागान विकसित किए जाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि जिले में चाय की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए निजी स्तर पर काश्तकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा ग्रामीणों से अपनी नाप भूमि में चाय की खेती के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए जा रहे हैं।
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प्रस्ताव मिलने के बाद बोर्ड की ओर से संबंधित क्षेत्र का मृदा परीक्षण कराया जाएगा। परीक्षण उपयुक्त रहने पर छीड़ापानी स्थित नर्सरी से पौध उपलब्ध कराई जाएंगी। उनका कहना है कि ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत भी चाय की खेती को प्रोत्साहित करने से अब कई किसान सामने आने लगे हैं।

विदेशों को होता है ग्रीन लीफ चाय का निर्यात
चंपावत। जिला मुख्यालय के सिलिंगटाक और छीणापानी में उत्पादित होने वाली हरी पत्ती (ग्रीन लीफ) चाय देश के विभिन्न शहरों के अलावा विदेशों में धूम मचा रही है। वर्तमान में चाय विकास बोर्ड की ओर से यहां उत्पादित चाय की बिक्री 12 सौ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है। चाय की मार्केटिंग कोलकाता में होती है, जिसके बाद चाय को जर्मनी, इंग्लैंड सहित अन्य यूरोपीय देशों को निर्यात किया जाता है।

चार सौ से अधिक श्रमिकों को मिल रहा रोजगार
चंपावत। चाय विकास बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड के अनुसार जिले में चाय बागान के क्षेत्रफल का विस्तार लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं इससे ग्रामीणों की आय बढ़ने के साथ ही रोजाना करीब चार सौ श्रमिकों को भी रोजगार मिल रहा है। जिले के सिलिंगटाक, छीड़ापानी, मुड़ियानी, मौराड़ी, मझेड़ा, चौकी, सुयालखर्क, भगाना भंडारी, कालूखान, नरसिंहडांडा, गोसनी, लमाई, दुबडजैनल, खेतीखान आदि ग्राम पंचायतों की 210 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर चाय के बागान स्थापित कर उत्पादन शुरू हो गया है।
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