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शारदा खनन का आज आखिरी दिन, कल घर भेजे जाएंगे यूपी के श्रमिक

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हल्द्वानी/टनकपुर(चंपावत)। प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाली गौला नदी समेत कुमाऊं की नदियों में आज शाम से खनन बंद हो जाएगा और नंधौर और शारदा नदी के खनन गेटों को भी बंद कर दिया जाएगा। लॉकडाउन के चलते वन विकास निगम इस वर्ष किसी भी नदी से खनन लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया है। इसके चलते प्रदेश को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। खनन बंद होने के साथ श्रमिकों की भी घर वापसी होगी। चंपावत में खनन विभाग ने यूपी के मजदूरों को उनके घर भेजने की तैयारी कर ली है।
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प्रदेश में अक्तूबर से मई तक खनन सत्र चलता है। गौला की बात की जाए तो 18 लाख घनमीटर उपखनिज निकासी के लक्ष्य को वन विकास निगम ने मार्च तक पूरा कर लिया। अन्य वर्षों की अपेक्षा लक्ष्य कम होने से शासन ने एक और सर्वे कराया जिसमें गौला से 13.69 लाख, नंधौर से 6.94 और शारदा से 4.44 लाख घनमीटर उपखनिज निकासी का लक्ष्य रखा गया। मार्च से खनन फिर शुरू हुआ तो लॉकडाउन के चलते 22 मार्च से 30 अप्रैल तक खनन बंद कर दिया गया। इसके बाद एक महीने के कुल 43.54 लाख लक्ष्य में से निगम सिर्फ 31.90 लाख घनमीटर के लक्ष्य को ही पूरा कर पाया। इससे सरकार को कुल डेढ़ अरब रुपये ही राजस्व मिला। उधर, टनकपुर में भी शारदा से खनन व्यवसाय खासा प्रभावित रहा। खनन प्रभारी हरीश पाल ने बताया कि खनन अवधि बढ़ाने के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर फिलहाल शासन ने कोई फैसला नहीं है। जिस कारण 31 मई की शाम पांच बजे खनन बंद कर दिया जाएगा। विभाग की ओर से खनन में लगे यूपी के श्रमिकों को घर भेजने की तैयारी की जा रही है। सोमवार को रोडवेज की बसों से सभी श्रमिकों को घरों के लिए रवाना किया जाएगा।
लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारण खनन सत्र को एक महीने बढ़ाने की मांग की गई है लेकिन अभी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लॉकडाउन में नदी बंद होने के कारण पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है।
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डॉ. जीसी पंत क्षेत्रीय प्रबंधक, वन विकास निगम, कुमाऊं परिक्षेत्र
अब टिंबर से मिलेगा राजस्व
हल्द्वानी। वन विकास निगम खनन के साथ ही टिंबर से भी सरकार को करोड़ों का राजस्व देता है। सत्र पूरा होने से खनन थम गया है लेकिन वन विकास निगम ने अब टिंबर की निलामी शुरू कर दी है। अब तक निगम को टिंबर की नीलामी से एक करोड़ 80 लाख रुपये का राजस्व मिला है।
वन विकास निगम जंगलों में लकड़ी का कटान कर उसे डिपो में जमा करने के बाद उसकी नीलामी करता है। निगम के माध्यम से निलाम की गई लकड़ी प्लाईवुड, गत्ता, फलपेटी उद्योग के साथ ही निमार्ण कारोबार के लिए लोगों को सस्ती दरों पर उपलब्ध हो जाती है। लकड़ी भंडारण के लिए निगम के पास कुमाऊं के रामनगर, हल्द्वानी, लालकुआं, कालाढूंगी, खटीमा और टनकपुर में 12 डिपो हैं। निगम लकड़ी लॉट में गोल लकड़ी, चिरान की लकड़ी, जड़ और जलौनी लकड़ी की नीलामी करता है। लॉकडाउन के कारण लकड़ी नीलामी और उसके परिवहन में कुछ प्रभाव पड़ा लेकिन भंडारण की गई लकड़ी खराब न हो और बरसात में जंगलों में डंप पड़ी लकड़ी भी नष्ट न हो इसके लिए शासन ने लॉकडाउन के बीच वन विकास निगम को लकड़ी ढुलान की अनुमति दी थी जिससे निगम को कुछ हद तक राहत मिली।
कुमाऊं के सभी डिपो में क्रम के अनुसार टिंबर नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभी तक एक करोड़ अस्सी लाख रुपये का राजस्व लकड़ी नीलामी से मिला है। नीलामी की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी जिससे अधिक से अधिक राजस्व जुटाया जा सके।
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डॉ. जीसी पंत, क्षेत्रीय प्रबंधक, वन विकास निगम
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