स्कूल छोड़ने वाली निर्धन छात्राओं के लिए स्थापित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के हाल भी कम निराले नहीं है। यहां पढ़ाई तो हो रही है, मगर इन छात्राओं के रहने की व्यवस्था बे-पटरी है। 50 की क्षमता वाले छात्रावास में दोगुनी (100) छात्राएं रह रहीं हैं और ये तब है, जब दूसरा छात्रावास न केवल बन चुका है, बल्कि करीब आठ माह पहले इसका उद्घाटन भी हो चुका है।
टनकपुर कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छात्राएं छठीं से आठवीं कक्षा तक महात्मा गांधी जूनियर हाईस्कूल और नौंवी से बारहवीं तक की छात्राएं जीजीआईसी में पढ़ती है। आवासीय विद्यालय होने की वजह से इनके लिए छात्रावास हैं। जूनियर तक की 50 छात्राओं के लिए गांधी हाईस्कूल से करीब 400 मीटर दूर छात्रावास है, मगर इस हॉस्टिल में जूनियर की ही नहीं, नौंवी से बारहवीं तक की छात्राएं भी रह रही है। 50 की क्षमता वाले हॉस्टिल में दोगुनी छात्राओं के रहने से भारी दिक्कतें हो रही हैं।
सोने से लेकर शौचालय तक की असुविधा इन छात्राओं को हो रही है। ये हाल तब है, जब हाईस्कूल और इंटर की छात्राओं के लिए नया छात्रावास बन चुका है। यहां तक कि टनकपुर स्टेडियम के पास 233.21 लाख रुपये की लागत से बने इस छात्रावास का विधिवत उद्घाटन पिछले साल जून में टनकपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया था।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के नए छात्रावास में नौंवी से बारहवीं की छात्राओं को शिफ्ट नहीं करने का कारण सुरक्षागत पहलू हैं। जल्द ही छात्रावास को शुरू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। वार्डन और शिक्षिकाओं के रिक्त पदों पर तैनाती के प्रयास किए जा रहे हैं। -हेमेश खर्कवाल, विधायक।
कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छठीं से बारहवीं तक की छात्राओं के एक ही छात्रावास में रहने से परेशानी हो रही है। नए छात्रावास में छिटपुट काम बचा था, जिसके पूरा होने के बाद छात्रावास को शिक्षा विभाग अपने स्वामित्व में लेकर नौंवी से इंटर तक की छात्राओं के रहने की व्यवस्था करेगा। -नवीन चंद्र पाठक, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।