रीठा साहिब में अस्थायी पार्किंग में खड़े वाहन।
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गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ के महाभोग और अरदास के साथ रीठा साहिब गुरुद्वारे में चल रहे जोड़ मेले का समापन हो गया है। तीन दिवसीय मेले में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मत्था टेक मनौती मांगी। मेला संपन्न होने के बाद तीर्थयात्रियों की वापसी का सिलसिला तेज हो गया है।
गुरुद्वारे में देर तक सबद-कीर्तन जारी रहा। सिख संगत को अमृतसर के ग्रंथी पूरन सिंह, दिल्ली के बाबा बच्चन सिंह ने सिख धर्म गुरुओं के त्याग और बलिदान का स्मरण कराया।
सरबत की भलाई के लिए अरदास की गई। दूरदराज से आए जत्थेदारों ने भी सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। महाभोग का लंगर छकने के बाद यहां से तीर्थयात्रियों की रवानगी शुरू हुई। मेला समाप्त होने के बाद गुरुद्वारे की सफाई में लोग जुटे हुए हैं। कारसेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह और प्रबंधक बाबा श्याम सिंह ने तमाम जगहों से पहुंचे तीर्थ यात्रियों का स्वागत किया।
पुलिस की सख्ती काम आई, कम हुई ट्रकों में आवाजाही
रीठा साहिब जोड़ मेले में हर साल हजारों लोग ट्रकों से यात्रा करते थे। मगर पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र गुंज्याल की सख्ताई के चलते इस बार ये तादात काफी कम रही। इस बार अधिकांश लोग बाइक और बसों से आए। अलबत्ता कुछ ट्रकों में ही तीर्थयात्री रीठा साहिब पहुंचे। टनकपुर से रीठासाहिब पहुंचने के लिए 150 किमी का पहाड़ी रास्ता तय करना पड़ता है। अलबत्ता मंगलवार को जिला मुख्यालय में कई बार जाम की नौबत आई।
मुड़ियानी में हजारों लोगों ने लंगर छका
जिला मुख्यालय से चार किमी दूर मुड़ियानी में लगा लंगर मंगलवार शाम संपन्न हो गया। गुरु रामदास सेवा समिति के मुख्य कार सेवक हरभजन सिंह और बलवंत सिंह ने बताया कि लंगर में हजारों सिख तीर्थ यात्रियों के अलावा स्थानीय लोगों ने भी प्रसाद ग्रहण किया। खटीमा, नानकमत्ता, सितारगंज और ऊधमसिंह नगर से आई सिख संगत के निर्मल सिंह, अजवतार सिंह, देवेंद्र सिंह, जसवंत सिंह, सुखदेव सिंह, बलवीर सिंह, डा.सरजीत सिंह और सुखवीर सिंह समेत तमाम कार सेवक शामिल थे। टनकपुर से रीठा साहिब के बीच 150 किमी के फासले में नौ भंडारे लगे हैं।