लधिया घाटी के इकलौते औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के हाल प्राथमिक विद्यालय से भी बदतर हैं। किराए के एक कमरे में चलने वाले इस केंद्र के पास न तो पर्याप्त जगह है और नहीं बुनियादी ढांचा। बंद हो चुकी दुकान में आईटीआई का संचालन हो रहा है।
2015 में भिंगराड़ा में आईटीआई खुला गया था। उस समय इलेक्ट्रिकल्स, कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन (कोपा) और फिटर के ट्रेड को मंजूरी मिली, मगर दो साल बाद भी सिर्फ एक ट्रेड ही चल पा रहा है। इलेक्ट्रिकल्स के इस ट्रेड में 12 छात्र हैं। इन छात्रों को सीखाने के लिए सिर्फ एक अनुदेशक हैं।
जगदीश चंद्र भट्ट और कमल भट्ट ने न केवल आईटीआई संचालन के लिए जगह दी है, बल्कि छात्रों के बैठने के लिए उनके द्वारा बैंच भी दिए गए हैं।
अनुदेशक हरीश चंद्र पांडेय भी मानते हैं कि जगह और जरूरी सुविधाओं की कमी से शिक्षण का काम प्रभावित हो रहा है। इसी वजह से दो अन्य ट्रेड भी संचालित नहीं हो पा रहे हैं। आईटीआई के लिए जमीन की तलाश पूरी कर ली गई है, मगर इसके आगे की अड़चन अभी दूर नहीं हो सकी है।
पैरा लीगल वालंटियर उमेश चंद्र भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चंद्र भट्ट सहित इलाके के लोगों का कहना है कि अगर इस संस्थान के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने के साथ सभी तीनों ट्रेडों का संचालन किया गया होता, तो करीब 30 ग्राम पंचायतों के नौजवानों को इसका लाभ होता। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल तो इस आईटीआई के हाल किसी प्राइमरी से भी बदतर हैं।
भिंगराड़ा के आईटीआई के भवन निर्माण की प्रक्रिया नए वित्त वर्ष में शुरू की जाएगी। आईटीआई में अनुमोदित तीनों ट्रेडों के संचालन के अलावा अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि संस्थान का अपना भवन बनने तक व्यवस्था सुचारू चल सके। -पूरन सिंह फर्त्याल विधायक, लोहाघाट।
12 साल में खुले चार आईटीआई
उत्तराखंड राज्य बनने से पूर्व तक चंपावत जिले में तीन आईटीआई टनकपुर, चंपावत व खेतीखान में थे। मगर राज्य बनने के बाद आईटीआई की तादात बढ़कर सात हो गई। ये आईटीआई बाराकोट, दिगालीचौड़, मंच और भिंगराड़ा में खोले गए हैं। इनमें से किसी के पास भी अपना भवन नहीं है। इक्का-दुक्का ट्रेडों के सहारे चलने वाले इन चारों संस्थानों में बमुश्किल 136 छात्र हैं।