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38 नहरों से नहीं हो रही सिंचाई

Sun, 09 Dec 2018 09:38 PM IST
ब्यूरो् /अमर उजाला, चंपावत।
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वैला क्षेत्र की बंद गूल। - फोटो : अमर उजाला
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 रबी की फसल की बुवाई शुरू हो गई है, लेकिन समय से बारिश नहीं होने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तो नहरों के क्षतिग्रस्त होने से सिंचाई नहीं हो पा रही है। वहीं दूसरी ओर जंगली जानवरों से किसान परेशान है।
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चंपावत जिले में करीब 40 प्रतिशत नहरें बंद हैं। 95 नहरों में से 38 नहरें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं और 20 नहरों को विभाग ने परित्याग कर दिया हैं। कभी 1115 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होती थी वहां अब सिर्फ  723 हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई हो पा रही है।

जिले में 281 किमी लंबी 95 नहरों का निर्माण किया गया है। इन नहरों से 1115 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी। लेकिन इस वक्त 57 नहरें ही चालू हाल में है। इनमें से स्रोत में पानी की कमी, आपदा में नुकसान होने के चलते 18 नहरें बंद हैं। इसके अलावा 20 नहरें परित्याग हो चुकी है। भारतीय किसान यूनियन जिलाध्यक्ष नवीन करायत सहित तमाम किसानों का कहना है कि सिंचाई की कमी उनकी पैदावार को प्रभावित कर उनकी मेहनत पर मार कर रही है।
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उधर, लोहाघाट खंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुरेशचंद्र रावत का कहना है कि बंद पड़ी नहरों को चालू करने के लिए 101.60 लाख रुपये का आगणन भेजा गया है। इस रकम से 16 नहरों की मरम्मत के अलावा 13 जगह बाढ़ सुरक्षा के कार्य कराएं जाएंगे। बजट मिलने पर बंद पड़ी नहरों की मरम्मत और दूसरे कार्य कराए जाएंगे।  


बंद सिंचाई योजना 18  
सेरा, सन्यूड़ा, डांडा, फुंगर, बयाला, वैला दाई, वैला बाई, वैला पिनाना, बौतड़ी, छुलापै, बाराकोट, तल्ला गांव, बूम, तल्ली लड़ी, साल, गुरैली, पासम और बिंडा तिवारी।  

परित्याग नहरें 20  
तरकुली, चंचलपुर, गरसाड़ी, ओलखढुंगा, ढकना, द्यिूरी, साल-टांण, कलजाख, दुधौरी, बेलखेत द्वितीय, कठौल चल्थी, पड़ासो, करौली, चौड़ागूंठ, रमैला, निडिल, खूना, पसौली, बिशुंग और मंगोली। 
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