चंपावत के बमनपुरी गांव में रिंगाल और मौज घास से सजावटी वस्तुएं तैयार करती महिलाएं।
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चंपावत। जिले के बनबसा में थारू जनजाति बाहुल्य गांव बमनपुरी की महिलाओं ने बेकार समझे जाने वाले रिंगाल और मौज घास को अपने रोजगार का जरिया बनाने में सफलता हासिल की है। यहां बीते दो सालों में स्वयं सहायता समूह की 50 से अधिक महिलाएं घरेलू उपयोग और सजावट की वस्तुएं बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं। महिलाओं की ओर से निर्मित टोकरियों, फूलदान और हॉट पाट की बाजार में लगातार मांग बढ़ती जा रही है। हस्तनिर्मित उत्पादों की मांग बढ़ने पर जिला प्रशासन ने इनके विपणन के लिए विकास भवन में आउटलेट उपलब्ध कराया गया है।
गौरतलब है कि थारू जनजाति बाहुल्य बमनपुरी गांव की महिलाओं ने रिंगाल और मौज घास को आजीविका का साधन बनाया है। ग्राम्य विकास अभिकरण की जिला परियोजना निदेशक विम्मी जोशी ने बताया कि बमनपुरी गांव की कुछ महिलाएं अपने उपयोग के लिए घास से निर्मित टोकरियां, फूलदान और अन्य वस्तुएं बनाती थी। उनके कौशल को देखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत उन्हें ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) से प्रशिक्षण देकर कौशल का विकास किया गया है। अब इन उत्पादों के विपणन के लिए आउटलेट केंद्र भी उपलब्ध करा दिया गया है।