महंगाई के दौर में मिल रहा सस्ता खाना अब लोगों को शायद नहीं मिल पाएगा। सिर्फ 30 रुपये थाली के हिसाब से इंदिरा अम्मा भोजनालय में मिलने वाले भोजन पर अब ब्रेक लग सकता है। चंपावत बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति ने दो कमरों में चल रहे भोजनालय की जगह को खाली करने के आदेश दिए हैं।
19 नवंबर 2015 से शुरू इंदिरा अम्मा भोजनालय सहकारी समिति के मोटर स्टेशन के पास बने भवन के दो कमरों में बगैर किराए के चल रहा है। अब समिति ने इस भोजनालय के कमरों को खाली कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए बाकायदा दो बार प्रस्ताव भी पारित किया है। भोजनालय के संचालक गिरधर सिंह फर्त्याल का कहना है कि भोजनालय के भवनों को खाली कराने के लिए समिति बार-बार दबाव डाल रही है।
ऐसे में इस सस्ते भोजनालय को बंद करना मजबूरी हो जाएगा। अगर यह भोजनालय बंद हुआ तो लोगों को 30 रुपये में मिलने वाले खाने की सुविधा नहीं मिल पाएगी। खुले बाजार में प्रति थाली भोजन न्यूनतम 50 रुपये में मिलता है। हरीश जोशी, सचिव, चंपावत सहकारी समिति ने कहा कि सहकारी समिति की दो दुकानों की दर नवंबर 2015 से बगैर किराये के इंदिरा अम्मा भोजनालय के पास है।
बगैर किराये के दो दुकानों की दर दिए जाने से समिति को नुकसान हो रहा है। भोजनालय संचालक की ओर से समिति को कोई किराया नहीं दिए जाने से इन्हें खाली कराए जाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में नवंबर 2018 से अब तक समिति दो बार प्रस्ताव भी पास कर चुकी है। भोजनालय वाली जगह को खाली कराने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
इस जगह पर खुलेगा पतंजलि का स्टोर
चंपावत सहकारी समिति इंदिरा अम्मा भोजनालय को खाली कराकर इस जगह का उपयोग दूसरे रूप में करेगी। समिति का कहना है कि उसे पतंजलि के स्टोर को संचालित करने के लिए जगह चाहिए। इस जगह का उपयोग पतंजलि का स्टोर खोलने में किया जाएगा। समिति के सचिव हरीश जोशी का कहना है कि समिति भवन में कुल 8 दुकानों की दर है, जिसमें से छह से करीब 2500 रुपये मासिक के हिसाब से किराया मिल रहा है लेकिन इंदिरा अम्मा भोजनालय वाली दो दुकानों से एक भी रुपया नहीं मिल रहा है। इसके चलते उन्हें राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
निशुल्क होनी थीं भोजनालय में ये व्यवस्थाएं
इंदिरा अम्मा भोजनालय को खोलते वक्त प्रदेश शासन ने इसके संचालन के लिए गाइडलाइन जारी की थी। इसके तहत सस्ते और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए कई रियायतें दी गई थी। अगस्त 2015 में प्रदेश शासन के सचिव विनोद फोनिया की ओर से जारी पत्र में भोजनालय के लिए निशुल्क जगह, ईंधन, बिजली और पेयजल व्यवस्था के साथ राज्य सरकार द्वारा प्रति थाली 10 रुपये के अनुदान की व्यवस्था की गई थी।