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नेपाल में महाभियोग पर गरमाई राजनीति, प्रबुद्ध वर्ग भी असंतुष्ठ

Thu, 04 May 2017 11:03 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बनबसा (चंपावत)।
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नेपाल सरकार द्वारा नेपाल के प्रमुख न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर वहां की राजनीति में भूचाल आ गया है। महाभियोग का सर्वत्र विरोध होने लगा है। महाभियोग को नेपाल की न्यायपालिका को ध्वस्त करने वाला कदम बताया जा रहा है। पूर्व न्यायाधीशों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और व्यापारियों ने प्रदर्शन कर प्रमुख न्यायाधीश के खिलाफ लाए जा रहे महाभियोग को वापस लेने की मांग की है। 

नेपाल में प्रमुख न्यायाधीश सुशीला कार्की के खिलाफ नेपाली सरकार द्वारा लाया गया महाभियोग सरकार के गले की हड्डी बनता नजर आ रहा है। करीब बीस साल बाद होने वाले निकाय चुनाव के समय उठाए गए सरकार के इस कदम से चुनाव प्रभावित होने की आशंका है।   प्रमुख न्यायाधीश के खिलाफ लाया गया महाभियोग सरकार के लिए भी चुनौती बन सकता है। पूर्व न्यायाधीश फोरम नेपाल से संबद्ध  पूर्व न्यायाधीश केदारनाथ उपाध्याय, केदार प्रसाद गिरि, टोप बहादुर सिंह, गोपाल प्रसाद खत्री, राजेंद्र कुमार भंडारी, गौरी ढ़काल, पवन कुमार ओझा आदि ने सरकार के इस कदम को न्यायालय के ऊपर आघात बताया है। नेपाल के अग्रणी नागरिक, बुद्धिजीवियों, व्यवसायियों ने महाभियोग को वापस लेने की मांग की है। 
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सरकार के इस कदम को नेपाल की न्यायपालिका और लोकतंत्र के ऊपर आक्रमण बताया। सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद केसी, कृष्ण पहाड़ी, पूर्व प्रमुख निर्वाचन आयुक्त नीलकंठ उप्रेती, पूर्व न्यायाधीश कल्याण श्रेष्ठा समेत प्राध्यापकों, कानूनविदों , व्यवसायियों और नागरिकों ने प्रमुख न्यायाधीश कार्की के खिलाफ लाए गए महाभियोग को गलत बताया। सरकार के इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।   कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री रामचंद्र पौडेल ने भी ऐन चुनाव के समय लाए जा रहे महाभियोग से नेपाली सरकार और कांग्रेस पार्टी को होने वाले नुकसान से आगाह किया है। नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल एकीकृत माओवादी लेलिनवादी (एमाले) के अध्यक्ष केपी ओली शर्मा (पूर्व प्रधानमंत्री) ने भी प्रधानमंत्री प्रचंड से भेंट कर महाभियोग वापस न लेने पर संसद नहीं चलने देने की चेतावनी दी है। कहा कि न्यायपालिका में राजनीतिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नही किया जाएगा।
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