लोहाघाट (चंपावत)। कोलीढेक बहुउद्देश्यीय झील (जलाशय) का काम लंबा खींचता जा रहा है। एक तरफ तारीख पर तारीख बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर झील के निर्माण के लिए बजट अवमुक्त होने की गति भी सुस्त है। झील का काम पूरा होने के बाद पर्यटन और सिंचाई सुविधा के साथ ही रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।
डेढ़ हजार मीटर लंबी, 80 मीटर चौड़ी और 21 मीटर गहराई वाली इस झील को नवंबर 2020 में पूरा होना था। इस साल जून तक का कार्य अवधि विस्तार मिला। लेकिन जून के बाद डेढ़ महीना और बीत चुका है और अभी 79 प्रतिशत काम ही हो सका है। सिंचाई विभाग के ईई बीबी पांडेय ने बताया कि झील में डाउन स्ट्रीम के तीन ब्लॉकों और झील के किनारे 850 मीटर रिंग रोड का काम भी पूरा कर लिया गया है। वहीं झील में पानी निकासी और रोकने के लिए गेट लगाने आदि काम जल्द पूरा करने की बात कही जा रही है। काम में ही देरी नहीं हो रही है, बल्कि धन अवमुक्त होने में भी विलंब हो रहा है। 30.62 करोड़ से बनने वाली इस झील के लिए 21.97 करोड़ रुपये मिले हैं। कोरोना महामारी और मौसम को काम में देरी की वजह बताया गया। अब अक्तूबर तक काम पूरा कराने की बात कही जा रही है।
मुआवजे का ढाई करोड़ रुपये बंटना बाकी
लोहाघाट (चंपावत)। झील के डूब क्षेत्र में 736 खाताधारकों की जमीन प्रभावित हुई है। अपर सहायक अभियंता अमित उप्रेती ने बताया कि साढ़े आठ करोड़ रुपये की मुआवजा राशि के सापेक्ष छह करोड़ रुपये वितरित किया जा चुका है। कुछ ऐसे खाते हैं, जिनकी भूमि तो डूब क्षेत्र में आ रही है, लेकिन उनका पता नहीं चल पा रहा है। कुछ ऐसे खाताधारक हैं जिनकी भूमि वर्ग चार में है और उनकी भूमिधरी के आदेश नहीं होने से मुआवजा नहीं दिया जा सका है। इसके अलावा कुछ ऐसे लोग है, जिनके पास वारिसनामे के आदेश नहीं है। विभाग का कहना है कि कार्रवाई पूरी होने और जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद मुआवजे का भुगतान कर दिया जाएगा।
डिप्टेश्वर झील और कूर्म सरोवर के लिए दो साल बाद मिले 46 लाख
चंपावत। चंपावत को झील नगरी बनाने की कवायद में आए लंबे ठहराव को चुनावी साल ने गति दी है। दो साल बाद यहां की दो झीलों की डीपीआर (विस्तृत प्रगति रिपोर्ट) बनाने के लिए शासन ने 46.30 लाख रुपये अवमुक्त किए हैं। सचिव हरीश चंद्र सेमवाल ने मंगलवार को ये राशि जारी की है। इससे पूर्व 2019 में इन दोनों झीलों के सर्वे और परीक्षण के लिए 37.08 लाख रुपये दिए गए थे।
विधायक कैलाश गहतोड़ी की पहल पर 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चंपावत की गंडकी नदी के पास डिप्टेश्वर झील और सिमल्टा की कूर्म सरोवर के निर्माण की घोषणा की थी। दो साल बाद यानी 2019 में झील के सर्वे और भूगर्भीय रिपोर्ट के लिए 20.53 लाख और सरोवर के लिए 16.55 लाख रुपये मिले। सिंचाई विभाग के ईई बीसी पांडेय का कहना है कि परीक्षण में झील और सर्वे निर्माण के अनुकूल पाई गई थी। और अब टीएसी द्वारा अनुमोदित 115.77 लाख की लागत के सापेक्ष अब प्रदेश शासन ने 46.30 लाख रुपये अवमुक्त किए हैं। इस राशि से आईआईटी के इंजीनियरों से परीक्षण और सर्वे संबंधी अन्य कार्य किए जाएंगे।
डिप्टेश्वर झील के डूब क्षेत्र में आ रही 5.90 हेक्टेयर जमीन
चंपावत। डिप्टेश्वर झील डेढ़ किमी लंबी, 40 से 45 मीटर चौड़ी और 15 मीटर ऊंचाई बनाया जाना प्रस्तावित है। इसमें 5.90 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है। यद्यपि अभी झील और सरोवर एकदम शुरुआती दौर में है। लेकिन इसके बनने से पर्यटन को पंख लगने के साथ सिंचाई, पेयजल और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
अवमुक्त राशि का विवरण:
योजना अनुमोदित लागत- अवमुक्त राशि (लाख रुपये में)
डिप्टेश्वर झील 63.45- 25.38
कूर्म सरोवर: 52.32- 20.92