2013 में पैसा कमाने के लिए केदार घाटी गए माता-पिता का आपदा के बाद पता नहीं चल सका। तबसे ये छोटे बच्चे आपदा के बड़े जख्म झेल रहे हैं। अपने मामा के घर में दिन गुजार रहे इन बच्चों को कोई सरकारी मदद भी नहीं मिली।
रोलपा (नेपाल) के खड़क सिंह (35) और उनकी पत्नी मधु देवी (32) मई 2013 में होटल कारोबार के लिए एक अन्य साथी के साथ काजुला (केदार घाटी) गए। सीजन में कुछ वर्षों से पैसा कमाने के लिए वे केदार घाटी जाते थे। 15 जून से तीन दिन तक आई भीषण आपदा के बाद से इन तीनों का कोई पता नहीं चल सका। खड़क और मधु के तीनों बच्चे तब से माता-पिता के बगैर जिंदगी काट रहे हैं। इनके नाम हैं मुस्कान (10), सुनील (13) और कमल थापा (15)। ये तीनों बच्चे चंपावत में अपने मामा करन सिंह, मामी अनीता, मौसी कमला के साथ रह रहे हैं। करन बताते हैं कि आखिरी बार 13 जून 2013 को उनकी बात हुई थी। तबसे कोई पता नहीं चल सका। महेंद्रनगर नेपाल निवासी करन छोटे होटल से जीविका चलाते हैं। मगर वे इन बच्चों को स्कूल भेजने के साथ ही परवरिश भी कर रहे हैं। इन बच्चों को कोई सरकारी मदद भी नहीं मिल सकी है। स्वयंसेवी संगठनों के हाथ भी मदद को आगे नहीं बढ़े। बस एआरटीओ विमल पांडेय इनकी जरूर मदद करते थे लेकिन उनका भी इस माह तबादला हो चुका है। ऐसे में इन नन्हें बच्चों के सामने मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।