चंपावत जिले में राज्य बनने के बाद ऊर्जा की स्थिति बेहतर हुई है। फीडर से लेकर ट्रांसफार्मर की संख्या में ही वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि बिजली की कटौती भी नगण्य हुई है। चंपावत जिले की सबसे बड़ी उपलब्धि पारेषण लाइन है।
ऊर्जा प्रदेश उत्तराखंड के चंपावत जिले में राज्य बनने के बाद ऊर्जा की स्थिति बेहतर हुई है। फीडर से लेकर ट्रांसफार्मर की संख्या में ही वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि बिजली की कटौती भी नगण्य हुई है। चंपावत जिले की सबसे बड़ी उपलब्धि पारेषण लाइन है। पिथौरागढ़ से लोहाघाट के बीच 158 टावर से निर्मित 42 किमी लंबी लाइन बन चुकी है।
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लोहाघाट के डैसली में अगले साल तक बिजलीघर बनने के बाद 132 केवी बिजली की आपूर्ति पिथौरागढ़ के बजाय यहीं से होगी। इससे लाइन लॉस में कमी, ब्रेक डाउन से राहत, लो-वोल्टेज से निजात मिलने से चंपावत जिले के संपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
चंपावत जिले को उत्तराखंड के प्रमुख ऊर्जा केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए आईआईपी (भारतीय पेट्रोलियम संस्थान) पहल कर रहा है। पिरूल का़ उपयोग ईंधन के रूप में करने के लिए च्यूरा से बायो डीजल बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
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वैज्ञानिक डॉ. पंकज आर्या बताते हैं कि पिरूल से बना कोयला पूरी तरह कार्बन उत्सर्जन रहित होने के साथ लोगों की आय का भी जरिया बन सकेगा। चंपावत में 27292 हेक्टेयर क्षेत्र में चीड़ के जंगल होने के अलावा च्यूरा भी प्रचुर मात्रा में है। इसके लिए संस्थान ने पहले चरण में चंपावत ब्लॉक के दस गांवों का चयन किया है।