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सरकारी गल्ला विक्रेताओं की अनदेखी सरकार को पड़ेगी भारी

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चंपावत में धरना देते सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत/लोहाघाट। मानदेय की मांग के लिए सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं का रुख सख्त हो रहा है। संगठन ने गांधी जयंती के बावजूद चंपावत और लोहाघाट में दो अक्तूबर को धरना दिया। गल्ला विक्रेताओं ने दो टूक एलान कर दिया कि किसी भी रूप में 30 हजार रुपये मासिक मानदेय मंजूर किए बगैर गल्ले की दुकानों का संचालन नहीं करेंगे। खाद्यान्न उठान नहीं किए जाने से अक्तूबर में राशन वितरण और अन्न उत्सव कार्यक्रम पर अड़चन आने का खतरा बढ़ गया है।
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गल्ला विक्रेताओं का कहना है कि वह मुश्किल हालातों में खाद्यान्न वितरण कर रहे हैं, लेकिन उनकी वाजिब मांगों की सरकार अनसुनी कर रही है। इन हालातों में दुकानों का संचालन करना असंभव है। कहा कि गल्ला विक्रेताओं की अनदेखी सरकार को भारी पड़ेगी। चंपावत में दीवान सिंह, नित्यानंद, पूरन सिंह रावत, माधो सिंह, पुष्कर जोशी, मोहन सिंह, बालादत्त जोशी, पंकज साह, नंदन सिंह, डिकरदेव जोशी, भैरव सिंह, गोविंद बल्लभ आदि ने धरना दिया। वहीं लोहाघाट में जिलाध्यक्ष प्रकाश बोहरा के नेतृत्व में सुरेश जोशी, सरिता अधिकारी, राजीव मुरारी, हरीश चतुर्वेदी, चंद्रमोहन जोशी, तेज सिंह फर्त्याल, भरत राम, रमेश ढेक, राजू फर्त्याल आदि ने धरना दिया।
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