मानवता पर सरकारी सिस्टम की लचर व्यवस्था भारी पड़ गई। शारदा में डूबे एक अज्ञात युवक को साहसी तैराकों ने बचा तो लिया मगर समय पर इलाज न मिलने से उसकी जान चली गई। वह संयुक्त चिकित्सालय में करीब 21 घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ता रहा। लावारिस था इसलिए किसी को उसकी परवाह नहीं थी। इसी कारण 108 आपात सेवा ने भी अटेंडेंट न होने की बात कहकर उसे हायर सेंटर पहुंचाने से इन्कार कर दिया।
रविवार दोपहर शारदा स्नान घाट के सामने नदी के टापू में क्रिकेट खेल रहे शारदा चुंगी कॉलोनी के युवकों को नदी में डूबता एक युवक दिखाई पड़ा। साहसी तैराक कौशल और उसके साथियों ने उसे डूबने से बचा लिया। पुलिस कर्मियों ने उसे तुरंत संयुक्त चिकित्सालय पहुंचाया, लेकिन अस्पताल में भर्ती कराने के बाद पुलिस वाले भी उसे भूल गए। अस्पताल में उसे बार-बार दौरे पड़ रहे थे। सिर में चोट के कारण उसे न्यूरो चिकित्सा की जरूरत थी। स्थानीय अस्पताल में यह सुविधा न होने से उसे हायर सेंटर पहुंचाने वाला कोई नहीं था।
उपचार कर रहे चिकित्साधिकारी डॉ. दीपक गहतोड़ी के मुताबिक उन्होंने 108 आपात सेवा में फोन कर मरीज को हायर सेंटर पहुंचाने को कहा, लेकिन मरीज के साथ कोई अटेंडेंट न होने से 108 सेवा ने उसे ले जाने से इन्कार कर दिया। हालांकि उनका मानना था कि मरीज को समय पर न्यूरो चिकित्सा मिल जाती तो शायद उसकी जान बच सकती थी। संयुक्त चिकित्सालय टनकपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचएस ह्यांकी ने कहा कि मृतक अज्ञात था और उसका कोई अटेंडेंट भी नहीं था। ऐसे में उसे हायर सेंटर भेजना संभव नहीं था। युवक के हाथ में लरीनाथ भूमिराज स्वामी जय-जय गुदा होने से उसके नेपाल का नागरिक होने का अनुमान है। पुलिस ने पोस्टमार्टम करा शव 72 घंटे के लिए मोर्चरी में रखा है। कोतवाल अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि मृतक की शिनाख्त के लिए नेपाल पुलिस की भी मदद ली जा रही है।