चंपावत जिला सभागार में आयोजित दो दिनी कार्यशाला में प्रतिभाग करते ग्राम प्रधान।
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मुख्य विकास अधिकारी एसएस बिष्ट ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण में इस बात का ध्यान रखना होगा कि वहां के वातावरण के साथ मानव स्वास्थ्य पर भी कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। जिला कार्यालय सभागार में दो दिनी कार्यशाला के समापन के अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण की जानकारी के अभाव में कूड़े-कचरे को खुले क्षेत्र में फेंकने और घरेलू गंदे जल व कूड़े का सुरक्षित निस्तारण न करने के कारण कई लोग बीमारी की जद में आते हैं।
उन्होंने कहा कि सभी अपशिष्टों का उचित प्रबंधन करने के साथ बेकार पड़े अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से प्रयोग करके अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। कार्यशाला में पेयजल एवं स्वच्छता समन्वयक मोहम्मद आरिफ तथा धीरज जोशी ने ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए नाली, वर्मी कंपोस्ट पिट, बायोगैस प्लांट आदि की जानकारी दी। कार्यशाला में परियोजना निदेशक हरगोविंद भट्ट, जिला पंचायतराज अधिकारी सुरेश बैनी, ग्राम प्रधान हेमा देवी, सरस्वती देवी, प्रेम बल्लभ जोशी, मुकेश जोशी, दीपा देवी, रेखा बोहरा, मदन राम, अरूण कुमार, पुष्कर सिंह महर, बहादुर सिंह आदि उपस्थित रहे।