पौष माह के पहले रविवार से काली कुमाऊं क्षेत्र में बैठकी होली गायन शुरू हो गया है। कलश संगीत कला समिति के तत्वावधान में दिनेश बिष्ट के ड़डा स्थित आवास में बैठकी होली का शुभारंभ त्रिभुवन चंद्र बिष्ट ने सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया।
जिसके बाद गिरीश चंद्र पंत ने राग यमन कल्याण में मैय्या के मंदिरवा में दीपक वारो गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने राग काफी में दरद न जाने कोई से सुमधुर तान छेड़ी। तुलसी दत्त जोशी ने राग काफी में मन रंग दे करतार तथा उमापति जोशी ने जटन विराजत गंगा और डा.वीके पाठक ने अबकी टेर हमारी तथा दिनेश बिष्ट ने राग झिझोंटी उंचे भवन पर बस रही, प्रकाश पांडेय ने सतसंग बिना जिया तरसे और गिरीश पंत ने राग विहाग में नजर भर देखन दे की तान छेड़ी।
तबले पर दिनेश बिष्ट, वीके पाठक और ललित पंत ने ताल ठोंकी। ठंड की अधिकता के बावजूद देर रात्रि तक चली महफिल में डीएस बिष्ट, त्रिभुवन सिंह, रमेश चंद्र बिष्ट, दीवान सिंह, रवि दत्त जोशी आदि संगीत प्रेमी मौजूद रहे। इससे पूर्व कलश संगीत कला समिति के संरक्षक शिक्षक गिरीश चंद्र पांडेय के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।