नाचनी के भैंसखाल में इस्राइली पद्धति की योजना से इस तरह होती है सिंचाई।
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जब परंपरागत तरीके से बात नहीं बनी तो भैंसाखाल ग्राम पंचायत ने इजराइल तरीके की सिंचाई अपनाकर करीब 300 नाली खेतों की प्यास बुझाई। इसी का सबब रहा कि 2018 में इस ग्राम पंचायत को जल संरक्षण, सिंचाई और भूमि संरक्षण में प्रदेश में दूसरा स्थान मिला। अब यह पंचायत खेतों तक एक मीटर चौड़ा रास्ता बनाने की तैयारी में हैं। ग्राम प्रधान चंद्रकला दानू का कहना है कि इससे खेतों तक पावर ट्रिलर पहुंचाया जा सकेगा।
2014 मेें इस गांव में असिंचित भूमि को सिंचित करने की कोशिश शुरू हुई। ग्राम्या योजना में यहां 6.5 किमी की भूमिगत लाइन बिछाई गई। 16000 क्षमता वाले सात टैंक बनाए गए। इन पाइपों से खेतों तक पानी पहुंचाया गया। यही इजरायली तकनीक कही गई। इसके साथ ही जल संरक्षण के लिए चाल, खाल बनाए गए। स्रोतों को तारबाड़ से घेरा गया। आज ग्राम पंचायत के सभी परिवारों के पास पेयजल संयोजन हैं। ग्राम्या से 75 पशुपालकों के घर में चारा खाने के लिए पशु नाद बने हुए हैं। मेरा गांव मेरी सड़क योजना से 35 लाख लागत की सड़क का निर्माण हुआ है। राज्य और केंद्र वित्त मद से 90 प्रतिशत घरों को चारपहिया, दोपहिया वाहन मार्गों से जोड़ा गया है। ग्राम प्रधान का कहना है कि अब गांव में बड़ा पंचायतघर बनाया जा रहा है।