चंपावत। कोरोना की दूसरी और घातक लहर से निपटने के लिए जिले का सबसे बड़ा केंद्र जिला अस्पताल में बना डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर (डीसीएचसी) है। इस केंद्र की चुनौती का जिम्मा इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. गौरांग जोशी पर है। सूझबूझ और संजीदगी के साथ इस जिम्मेदारी को निभाते हुए वे अब तक 77 लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं। ये सभी कोरोना संक्रमित ठीक होने के साथ ही डिस्चार्ज हो चुके हैं। कोरोना के मरीजों को बचाने के साथ ही खुद को भी संक्रमण से बचाने की चुनौती के बीच वे इलाज के अलावा मरीजों को हिम्मत और हौसला भी दे रहे हैं।
कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते जिला अस्पताल के युवा डॉक्टर गौरांग जोशी अप्रैल महीने से पूरी शिद्दत के साथ सेवा दे रहे हैं। इस डीसीएचसी के आइसोलेशन वार्ड में 39 कोरोना संक्रमित मरीज हैं और सभी की स्थिति गंभीर है। हालात में सुधार के लिए इन सभी को ऑक्सीजन दी जा रही है। कोरोना संक्रमित मरीजों का हर दिन कम से कम दो बार परीक्षण होता है। डॉ. गौरांग बताते हैं कि संक्रमित आइसोलेशन वार्ड में खुद को संक्रमण से बचाने के लिए पीपीई किट, दो-दो दस्ताने, फेस सेवर सहित दो-दो मास्क और चश्मे का उपयोग करते हैं। परीक्षण पूरा होने के बाद इस किट को उतारने और डिस्पोज करने के साथ फिर सैनिटाइज करते हैं।
डॉ. गौरांग का कहना है कि डीसीएचसी में आ रहे संक्रमित मरीजों में से ज्यादातर खासी गंभीर स्थिति में आ रहे हैं। अधिकांश लोग बुखार, खांसी या अन्य दिक्कत होने पर पहले खुद ही दवा ले रहे हैं और हालत बिगड़ने पर संक्रमित होने की पुष्टि होने पर यहां भर्ती हो रहे हैं। देरी की वजह से संक्रमित लोगों को ठीक होने में अधिक समय और अधिक मुश्किल आ रही है। ऐसे में मामूली लक्षण दिखने पर जांच करा आइसोलेशन वार्ड में आने की सलाह दी है।