जिले के सबसे पुराने राजकीय पीजी कॉलेज के हाल बे-पटरी हैं। यहां न तो पर्याप्त शिक्षक है, न ही विषय। कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। और तो और प्रयोगशाला में पेयजल लाइन न होने से छात्र खुद पानी ढोकर प्रयोगात्मक काम करने को मजबूर हैं। सैन्य विज्ञान विषय का पद सृजित हुआ, लेकिन यह विषय कभी खुला नहीं। इस विषय को दो वर्ष पूर्व समाप्त कर दिया गया। वाणिज्य संकाय का भवन न होने से छात्र-छात्राओं को कला संकाय भवन में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
लोहाघाट कॉलेज में प्रवक्ताओं के तीस पद स्वीकृत है। जिनमें से दस पद रिक्त पड़े हुए हैं। प्रवक्ताओं की कमी को देखते हुए छह अतिथि शिक्षक तैनात किए गए थे, मगर उनकी सेवाएं भी समाप्त होने से दिक्कतें और बढ़ गई हैं। छात्र-छात्राओं को शिक्षकों के बगैर की पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद पुस्तकालय से छात्र-छात्राओं को पर्याप्त पुस्तकें नहीं मिल पा रही हैं। कॉलेज की चहारदीवारी नहीं होने से सुरक्षा तो खतरे पर पड़ रही है। कॉलेज में अक्सर जानवर और अराजक तत्वों का भी जमावड़ा अक्सर लग जाता है। इंदर ढेक, विनोद बगौली, दीपक फर्त्याल, दीपक देव आदि छात्र नेताओं का कहना है कि कॉलेज की समस्याओं के समाधान के लिए कई बार आवाज उठाई जा चुकी है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हो सका है।
विधि संकाय का सपना अधूरा रहा
अक्तूबर 2013 में पीजी कॉलेज में आए तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने पीजी कॉलेज में विधि संकाय खोलने का एलान किया था। लेकिन विधि संकाय आज तक नहीं खुला। जबकि इसे लेकर कई बार छात्र प्रतिनिधियों ने देहरादून तक दस्तक दी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
अतिथि शिक्षकों को हटानेे से और खराब हुई व्यवस्थाएं
राजकीय पीजी कॉलेज में हिंदी, संस्कृत, भूगोल, अर्थ शास्त्र, समाज शास्त्र, मनोविज्ञान, गणित, रसायन विज्ञान विषय में एक-एक और अंग्रेजी के दो स्थाई शिक्षकों के पद रिक्त चले आ रहे हैं। कालेज में रिक्त पदों के एवज में हिंदी, संस्कृत, भूगोल, मनोविज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित विषयों में अतिथि शिक्षकों की तैनाती की गई थी। लेकिन कुछ माह पहले अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त होने से पठन पाठन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित विषयों में केवल एक-एक ही शिक्षकों के पद सृजित हैं। कालेज में परास्नातक स्तर पर गणित व भौतिक विज्ञान, गृह विज्ञान विषय ही नहीं हैं। इन विषयों की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को बाहर जाना पड़ता है।
सीटें कम होने से नहीं मिल पा रहा प्रवेश
राजकीय महाविद्यालय में स्नातकोत्तर विज्ञान वर्ग में कम सीटें होने से छात्र-छात्राओं को विषयों की प्राथमिकता बदलने को मजबूर होना पड़ रहा है। रसायन विज्ञान में 15 और जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान में 10-10 सीटें स्वीकृत हैं। जिनमें प्रवेश नहीं मिलने से छात्र-छात्राओं को पिथौरागढ़ या दूसरे जिलों में दौड़ लगानी पड़ रही है। लंबे समय से इन विषयों में सीटें बढ़ाने की मांग की जाती रही है, लेकिन उनकी मांगे पूरी नहीं हो सकी हैं।
क्रासर
महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं के रिक्त पड़े पदों पर तैनाती की लगातार मांग की जाती रही है। बजट की कमी से विज्ञान संकाय में बने प्रयोगशाला में पाइप लाइन नहीं लगाई जा सकी है। वाणिज्य संकाय के भवन के लिए बजट नहीं मिला है। जिस कारण वाणिज्य की पढ़ाई दूसरे संकाय के भवन में करानी पड़ रही है।
प्रो.केकेएस नेगी, प्राचार्य, राजकीय पीजी कॉलेज लोहाघाट।