चंपावत। शिक्षा विभाग जिला मुख्यालय के जीजीआईसी को भी पर्याप्त शिक्षिकाएं नहीं दे पा रहा है। यहां की 481 छात्राओं को पढ़ाने के लिए शिक्षिकाओं की भारी कमी है। इंटर के विषयों में सात प्रवक्ता नहीं हैं तो एलटी में भी चार शिक्षिकाओं के बगैर काम चल रहा है। थकहार कर अभिभावक संघ द्वारा रखी गईं चार शिक्षिकाओं से किसी तरह पढ़ाई को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद शिक्षिकाओं की मेहनत से इंटर कला संकाय का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा।
जीजीआईसी इंटर में मात्र तीन विषयों (भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान व गृह विज्ञान) की प्रवक्ता हैं। वहीं एलटी में भी 11 में से महज सात ही पद भरे जा सके हैं। शिक्षिकाओं के न होने से बीते तीन वर्ष में 93 छात्राएं कम हो गई हैं। पीटीए (अभिभावक-शिक्षक संघ) अध्यक्ष भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि शिक्षिकाओं की कमी से कॉलेज की छात्राओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसके चलते अभिभावक कोष से प्रवक्ता में तीन (हिंदी, भूगोल व अर्थशास्त्र) और एलटी में एक शिक्षिका को रखा गया है। जिसके लिए छात्राओं से शुल्क लिया जाता है।
इन विषयों में नहीं हैं शिक्षिकाएं:
प्रवक्ता:हिंदी, अंग्रेजी, गणित, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल और मनोविज्ञान। एलटी शिक्षिका:हिंदी, विज्ञान, गृह विज्ञान व समाज विज्ञान।
कोट
शिक्षिकाओं के रिक्त पदों की वजह से पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। कई बार इस मामले लेकर उच्चाधिकारियों से आग्रह किया जा चुका है। अलबत्ता अब पीटीए द्वारा रखे गई चार शिक्षिकाओं से पढ़ाई सुचारू करने का प्रयास किया जा रहा है।
निधि सक्सेना,
प्रभारी प्रधानाचार्य
जिला मुख्यालय के जीजीआईसी में आधे-अधूरे स्टाफ से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की थीम पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षिकाओं की कमी से छात्राओं को अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
मुकुल पांडेय।
कई बार पदों को भरे जाने की मांग सीईओ से लेकर सीएम तक की जा चुकी है, मगर कुछ नहीं हुआ। अभिभावक कोष से चार शिक्षिकाओं को रख छात्राओं के भविष्य को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
भुवन चंद्र पांडेय,
अध्यक्ष, पीटीए, चंपावत।