चंपावत। गांवों में कोरोना संक्रमण उफान पर है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली दूर नहीं हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में खून की जांच से लेकर एक्सरे तक की सहूलियत तो दूर, इलाज करने के लिए भी डॉक्टर नहीं हैं। नेपाल सीमा से लगे तामली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के इलाज के लिए ना डॉक्टर है और न ही फार्मेसिस्ट। मरीजों की नब्ज टटोलने से लेकर दवा देने तक का काम एक स्वास्थ्य पर्यवेक्षक संतोष कुमार कर रहा है।
चंपावत से 51 किमी दूर तामली ही नहीं, टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित अस्पतालों के हाल भी खराब हैं। स्वांला के अस्पताल में ना डॉक्टर है और न ही फार्मेसिस्ट। यह अस्पताल लंबे समय से बंद है। वहीं धौन के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी डॉक्टर नहीं है। अलबत्ता यहां फार्मेसिस्ट भूपेश जोशी लोगों का इलाज करने के साथ दवाईयों का काम मुस्तैदी से कर रहे हैं। इन अस्पतालों में इस वक्त आने वाले में 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग बुखार ग्रस्त हैं। कोरोना की दूसरी लहर की सबसे ज्यादा मार गांवों पर पड़ी है। जिले में अब तक आए कुल 6284 कोरोना संक्रमितों में से 4021 लोग गांवों से हैं। इसी के चलते इस वक्त गांवों में 21 कंटेनमेंट जोन बने हुए हैं। ऐसे में गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत ठीक नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ रही हैं।
कोट
तल्लादेश क्षेत्र के कई गांवों के लोग तामली अस्पताल पर आश्रित हैं। लेकिन इस अस्पताल में काफी वक्त से डॉक्टर और फार्मेसिस्ट नहीं हैं। इस वजह से लोगों को जिला अस्पताल जाने की मजबूरी होती है।
भुवन जोशी, तामली।
तल्लादेश क्षेत्र में तामली के आसपास के दो गांव इस बार कंटेनमेंट जोन बने हैं। क्षेत्र में काफी लोग बुखार ग्रस्त है। लेकिन अस्पताल होने के बावजूद उन्हें इलाज से वंचित होना पड़ रहा है।
विमल, तामली।
तामली अस्पताल के डॉक्टर को कोरोना ड्यूटी पर भेजा गया है। वहीं मंच अस्पताल के फार्मेसिस्ट को तीन दिन तामली जाने को कहा गया है। स्वांला अस्पताल में जल्द ही फार्मेसिस्ट भेजा जाएगा। गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए तेजी से प्रयास किए जाएंगे।
डॉ. आरपी खंडूरी,
सीएमओ, चंपावत।